Correct option is C
सही उत्तर: (c) अयोगवाह
व्याख्या:
हिंदी वर्णमाला में 'अं' (अनुस्वार) और 'अ:' (विसर्ग) को अयोगवाह वर्ण कहा जाता है।
· ये न तो पूर्ण स्वर हैं और न ही पूर्ण व्यंजन।
· ये स्वर और व्यंजन दोनों के गुणों से युक्त होते हैं।
· अनुस्वार ('अं') नासिक्य ध्वनि उत्पन्न करता है और विसर्ग ('अ:') गले से उच्चरित होने वाला हल्का ध्वनि-विस्तार है।
'अं' और 'अ:' का वर्गीकरण:
1. अनुस्वार ('अं'):
· इसका उच्चारण स्वर और व्यंजन के बीच संतुलन बनाता है।
· उदाहरण: संगम, मंथन।
· इसका उपयोग पांचों वर्गों के पंचमाक्षर (ङ, ञ, ण, न, म) की ध्वनि के स्थान पर होता है।
· यह स्वर ध्वनि को नासिक्य बनाता है।
2. विसर्ग ('अ:'):
· यह स्वर की ध्वनि को हल्का विस्तार देता है।
· उदाहरण: धर्मः, कर्मः।
· इसका उपयोग संस्कृत के शुद्ध उच्चारण में होता है और यह गले से उच्चरित होता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प | शब्द | सही या गलत | स्पष्टीकरण |
A | स्वर | गलत | 'अं' और 'अ:' स्वर के गुण रखते हैं, लेकिन पूर्ण स्वर नहीं हैं। |
B | व्यंजन | गलत | ये पूर्ण व्यंजन भी नहीं हैं, क्योंकि इनका उच्चारण स्वतंत्र रूप से होता है। |
C | अयोगवाह | सही | 'अं' (अनुस्वार) और 'अ:' (विसर्ग) दोनों को अयोगवाह कहा जाता है। |
D | संयुक्ताक्षर | गलत | ये संयुक्ताक्षर नहीं हैं क्योंकि ये स्वतंत्र ध्वनियाँ हैं। |
1. अयोगवाह वर्ण:
· वे वर्ण जो स्वर और व्यंजन दोनों के गुणों को धारण करते हैं।
· ये वर्ण स्वर और व्यंजन दोनों के बीच का स्थान रखते हैं।
· हिंदी वर्णमाला में केवल 'अं' (अनुस्वार) और 'अ:' (विसर्ग) अयोगवाह हैं।
सूचना बूस्टर:
● अनुस्वार ('अं'): नासिक्य ध्वनि उत्पन्न करता है और पंचम वर्णों (ङ, ञ, ण, न, म) के स्थान पर प्रयोग होता है।