Correct option is A
सही उत्तर: A. व्यंग्य
व्याख्या:
व्यंजन शक्ति वह भाषा शक्ति होती है, जिसमें शब्दों से कोई छिपा हुआ, अप्रत्यक्ष या संकेतात्मक अर्थ निकलता है। इसमें वाक्य के शाब्दिक अर्थ के स्थान पर गूढ़ अथवा व्यंग्यपूर्ण अर्थ को प्रमुखता दी जाती है।
जब किसी कथन से सीधा अर्थ न निकलकर उसमें व्यंग्य, संकेत, कटाक्ष या गहराई से छिपा हुआ भाव व्यक्त किया जाता है, तो इसे व्यंजन शक्ति कहते हैं।
उदाहरण:
- "वाह! तुमने तो बहुत अच्छा काम किया!"
- यह वाक्य प्रशंसा के स्थान पर व्यंग्यात्मक (ताने भरे) रूप में प्रयुक्त हुआ है।
- "राजा इतना न्यायप्रिय था कि जनता भूख से मर रही थी!"
- यहाँ "न्यायप्रिय" शब्द का वास्तविक अर्थ नहीं, बल्कि व्यंग्यात्मक अर्थ लिया गया है।
विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प | अर्थ | सही/गलत | कारण |
|---|---|---|---|
A - व्यंग्य | अप्रत्यक्ष, छिपा हुआ, कटाक्षपूर्ण अर्थ | सही | व्यंजन शक्ति से जो भाव प्रकट होता है, वह व्यंग्य होता है। |
B - छंद | कविता की लयबद्ध संरचना | गलत | छंद का संबंध काव्य की बनावट से होता है, व्यंजन शक्ति से नहीं। |
C - अलंकार | काव्य को सुंदर बनाने वाले शब्द प्रयोग | गलत | अलंकार भाषा को अलंकृत बनाते हैं, व्यंजन शक्ति से नहीं जुड़े हैं। |
D - इनमें से कोई नहीं | — | गलत | सही उत्तर "व्यंग्य" (A) है। |
निष्कर्ष:
व्यंजन शक्ति से जो भाव उत्पन्न होता है, उसे "व्यंग्य" कहते हैं। सही उत्तर (A) है।