Correct option is A
सही उत्तर: (A) चाँद, साँस
उत्तर की व्याख्या:
अनुनासिक ध्वनि वह होती है जिसमें उच्चारण के समय कुछ ध्वनि नासिका (नाक) मार्ग से भी निकलती है। हिन्दी में अनुनासिक ध्वनियाँ (ँ) चिह्न से पहचानी जाती हैं, जैसे – चाँद, माँ, साँस आदि।
'चाँद' और 'साँस' में "ँ" लगा है, जो यह दर्शाता है कि इन शब्दों में अनुनासिकता का प्रयोग हुआ है। ये स्वर विशेषत: अनुनासिक स्वर कहलाते हैं।
विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प | सही/गलत | कारण |
|---|---|---|
A. चाँद, साँस | सही | इनमें 'ँ' का प्रयोग हुआ है, जो अनुनासिक ध्वनि को दर्शाता है। |
B. शेंकर, हिंदी | गलत | इनमें ‘ं’ (अनुस्वार) का प्रयोग है, जो अनुनासिक ध्वनि नहीं है। |
C. अं, अः | गलत | ये अनुस्वार (ं) और विसर्ग (ः) हैं, ये अनुनासिक ध्वनि नहीं दर्शाते। |
D. अतः, प्रातः | गलत | इनमें 'ः' (विसर्ग) का प्रयोग है, अनुनासिकता नहीं है। |
अतिरिक्त जानकारी:
अनुनासिक ध्वनि (Nasalized Sound): ध्वनि जो नाक से निकलती है और ‘ँ’ से दर्शाई जाती है।
उदाहरण: माँ, चाँद, हँसी
उदाहरण: माँ, चाँद, हँसी
अनुस्वार (ं): यह मुँह के द्वारा उच्चारित होता है, जैसे: हिंदी, कंद
विसर्ग (ः): यह हल्की सांस के साथ बोला जाता है, जैसे: अतः, प्रातः
निष्कर्ष:
'चाँद' और 'साँस' में अनुनासिकता स्पष्ट रूप से पाई जाती है, इसलिए सही उत्तर है –(A) चाँद, साँस