Correct option is B
विट्ठलनाथ अष्टछाप के संस्थापक थे
• वल्लभाचार्य के पुत्र विट्ठल नाथ ने सन 1865 ई. में अष्टछाप की स्थापना की
• अष्टछाप कवियों में चार शिष्य बलभाचार्य के तथा चार शिष्य विट्ठलनाथ के थे
• यह आठो भक्त श्रीनाथजी की नित्यलीला में अतरंग शखा के रूप में सदैव उनके साथ रहते थे इसी कारण इन्हें 'अष्टसखा' भी कहते हैं
• गोवर्धन में श्रीनाथजी की प्रतिष्ठा के बाद यह आठोशखा वहां सेवा के लिए प्रस्तुत हो गए
• अष्टछापीय कवि पुष्टिमार्गीय सेवा विधि में भी पूर्ण सहयोग देते थे
• अष्टछाप के कवि- बलभाचार्य के शिष्य कुभंनदास,सूरदास, परमानंद दास, कृष्ण दास
• विट्ठल नाथ के शिष्य - गोविंद स्वामी, छितस्वामी, चतुर्भुज दास, नंद दास
• विट्ठल नाथ ने बल्भाचार्य के ग्रंथो की टिकाएं लिखी इसके अतिरिक्त उन्होंने विद्वन मंडल,भक्ति निर्णय व श्रृंगार रस मंडन की रचना की
श्री हरि राय -
• इन्होंने 'अष्टसखान की वार्ता' पर भाव प्रकाश नमक टिप्पणी में अटो शाखों के लीलात्मक स्वरूप लीलासक्ति व अविकृत स्वभाव का विस्तार से उल्लेख किया है
नंददास -(1533 - 1583 ई.)-
• कृष्ण भक्ति काव्य परंपरा के प्रमुख कवि है
• सूरदास के बाद अष्टछाप के प्रमुख कवि है
• रचनाएं - अनेकार्थ मंजरी, मान मंजरी, रस मंजरी, रूपमंजरी विरह मंजरी, श्याम सगाई,सुदामा चरित्र, रुक्मणी मंगल, भंवर गीत रास पंचाध्यायी अध्याय सिद्धांत पंचाध्यायी, गोवर्धन लीला, नंददास पदावली, जोग लीला नामचिंतामणि माला