Correct option is B
सही उत्तर: (B) 5
व्याख्या: कर्नाटक संगीत (दक्षिणी संगीत पद्धति) की ताल पद्धति में 'जाति' का अत्यधिक महत्व है । किसी ताल के 'लघु' नामक अंग की मात्राओं की संख्या में परिवर्तन होने से पाँच मुख्य जातियों का निर्माण होता है । 'खंड जाति' (Khand Jati) में लघु की मात्राओं की संख्या 5 होती है । इसी मात्रा संख्या के आधार पर ताल का वजन और उसकी लयकारी बदल जाती है । दक्षिण भारतीय संगीत में इन जातियों के माध्यम से तालों के स्वरूप को विस्तार दिया जाता है ।
मुख्य बिंदु:
- कर्नाटक ताल पद्धति में मात्राओं के वजन के आधार पर मुख्य 5 जातियाँ होती हैं ।
- खंड जाति में मात्राओं की संख्या 5 मानी गई है ।
- ताल के 'लघु' विभाग की मात्राओं में बदलाव करके जातियों का निर्धारण किया जाता है ।
- अन्य जातियों की मात्रा संख्या: तिस्त्र (3), चतस्त्र (4), मिश्र (7) और संकीर्ण (9) है ।
- दो मात्रा वाले वर्णों को इन सभी जातियों में मिलाने का विधान भी संगीत पद्धति में दिया गया है ।