Correct option is C
भारतीय संगीत में
नाद के दो प्रमुख प्रकार माने गए हैं:
1.
आहत नाद: यह वह नाद है जो
किसी बाह्य स्रोत द्वारा उत्पन्न होता है और जिसे
कान से सुना जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, किसी वाद्य यंत्र की ध्वनि जैसे
सितार, तबला या बांसुरी से निकलने वाली ध्वनि आहत नाद है।
2.
अनाहत नाद: यह वह नाद है जो
बिना किसी बाह्य स्रोत के, केवल
शरीर के भीतर उत्पन्न होता है। यह एक
सूक्ष्म और आंतरिक ध्वनि होती है, जो
ध्यान या योग के दौरान अनुभव की जा सकती है। इसे
आध्यात्मिक ध्वनि भी माना जाता है, जो व्यक्ति के भीतर से निकलती है और बाहरी ध्वनियों से अलग होती है।
Information Booster:
1.
आहत नाद संगीत में वाद्य यंत्रों या ध्वनियों के माध्यम से उत्पन्न होती है, और इसे
सुनने योग्य माना जाता है।
2.
अनाहत नाद का अनुभव शारीरिक और मानसिक ध्यान या साधना के दौरान किया जाता है, और यह
बाहरी दुनिया की ध्वनियों से स्वतंत्र होती है।
3. इन दोनों प्रकार के नादों का उपयोग
भारतीय संगीत में शास्त्र और ध्यान में किया जाता है।
4.
आहत नाद बाहरी दुनिया से हमारे संपर्क का माध्यम होता है, जबकि
अनाहत नाद आंतरिक अनुभव की तरह होता है।
5. दोनों प्रकार के नाद को समझना संगीत और ध्यान की गहरी
सिद्धियों और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए आवश्यक है।