Correct option is A
केशव के बारे में रामचंद्र शुक्ल द्वारा कही गई सही बातें- 1,2,3
1. केशव को कवि ह्रदय नहीं मिला था।
2. उनमें वह सह्रदयता और भावुकता भी न थी जो एक कवि में होनी चाहिए।
3. वे संस्कृत साहित्य से सामग्री लेकर अपने पांडित्य और रचना कौशल की धाक जमाना चाहते थे
केशवदास (1555- 1617 ई.)
• ये ओरछा नरेश इंद्रजीत सिंह के आश्रित थे।
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इन्हें कठिन काव्य का प्रेत कहा है।
• उनकी कृति रामचंद्रिका अपनी संवाद योजना के लिए प्रसिद्ध है।
• विश्वनाथ प्रसाद मिश्र, नगेंद्र, गणपति चंद्रगुप्त, भगीरथ मिश्र ने इन्हें रीतिकाल का प्रवर्तक माना है।
केशव की रचनाएं-
• रसिक प्रिया (1591 ई.), कवि प्रिया (1601 ई.), रामचंद्रिका (1601 ई.), रतन बावनी (1607 ई.), वीर सिंह देवचरित (1607 ई.), विज्ञान गीता (1610 ई.), जहांगीर जस चंद्रिका (1612 ई.), नखशिख, छंदमाला, बारहमासा
केशवदास के बारे में रामचंद्र शुक्ल का कथन -
" केशव जी ने काव्य के सब अंगों का निरूपण शास्त्रीय पद्धति पर किया इसमें संदेह है नहीं है की काव्य रीति का सम्यक प्रतिपादन पहले पहल आचार्य केशव ने ही किया पर हिंदी में रीति ग्रंथो की अविरल और अखंडित परंपरा का प्र वाह केशव की कविप्रिया की पर्याय पचास वर्ष पीछे चला गया और वह भी एक भिन्न आदर्श को लेकर,केशव के आदर्श को लेकर नहीं!"