Correct option is B
सही उत्तर: (b) कर्मधारय
जो समास विशेषण-विशेष्य और उपमेय-उपमान के संबंध से मिलकर बनता है, वह कर्मधारय समास कहलाता है।
यह समास एक समानता या स्पष्टता दिखाता है, जहाँ पहला पद दूसरे पद की विशेषता या उपमा को प्रकट करता है।
उदाहरण:
- नीलकमल:
- 'नील' (विशेषण) + 'कमल' (विशेष्य) → 'नीला कमल'।
- यह विशेषण-विशेष्य का उदाहरण है।
- चंद्रमुख:
- 'चंद्र' (उपमान) + 'मुख' (उपमेय) → 'चंद्र जैसा मुख'।
- यह उपमेय-उपमान का उदाहरण है।
विशेषताएँ:
- पहला पद हमेशा दूसरे पद की विशेषता या तुलना दर्शाता है।
- इसमें पदों के बीच 'जैसा', 'वैसा', 'का', 'के', 'की' का भाव निहित होता है।
- समस्त पद के रूप में यह विशेषण या उपमान की तरह कार्य करता है।
अतिरिक्त जानकारी:
अव्ययीभाव समास:
- इसमें पहला पद अव्यय (जिसका रूप नहीं बदलता) होता है।
- यह समास पूरे वाक्य या अर्थ को अव्यय रूप में व्यक्त करता है।
उदाहरण:
- उपर्युक्त: (उपरि + उक्त → 'ऊपर कहा हुआ')।
- यथासमय: (यथा + समय → 'समय के अनुसार')।
तत्पुरुष समास:
- इसमें पहला पद (शब्द) दूसरे पद पर निर्भर करता है।
- इस समास में संबंध कारक (जैसे: 'का', 'के', 'की') निहित होता है।
उदाहरण:
- ग्रामवासिन्: (ग्राम + वासिन् → 'गाँव में रहने वाला')।
- देवालय: (देव + आलय → 'देवताओं का मंदिर')।
द्विगु समास:
- इसमें संख्यावाचक शब्द का समावेश होता है।
- यह समास किसी संख्या या संख्यावाचक शब्द के साथ मिलकर नया शब्द बनाता है।
उदाहरण:
- त्रिलोक: (त्रि + लोक → 'तीन लोक')।
- पंचवटी: (पंच + वटी → 'पाँच वृक्षों वाला क्षेत्र')।