Correct option is C
पद्यांश के अनुसार, रघुनंदन का आशय राम से है।
महावाहिनी के नायक सुग्रीव नहीं बल्कि लक्ष्मण हैं।
इसलिए कथन I सही और कथन II गलत है।
निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर दिए गए अगल छह प्रश्नों के उत्तर दीजिए
आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तर,
तुम वरो विजय संयत प्राणों से प्राणों पर;
रावण अशुद्ध होकर भी यदि कर सका त्रस्त
तो निश्चय तुम हो सिद्ध करोगे उसे ध्वस्त;
शक्ति की करो मौलिक कल्पना, करो पूजन,
छोड़ दो समर जब तक न सिद्धि हो, रघुनंदन!
तब तक लक्ष्मण हैं महावाहिनी के नायक
मध्य भाग में, अंगद दक्षिण-श्वेत सहायक,
मैं भल्ल-सैन्य; हैं वाम पार्श्व में हनूमान,
नल,नील, और छोटे कपिगण उनके प्रधान;
सुग्रीव, विभीषण, अन्य यूथपति यथासमय
आयेंगे रक्षा हेतु जहाँ भी होगा भय।”
नीचे दो कथन दिए गए हैं
कथन I. पद्यांश के अनुसार, रघुनंदन का आशय राम से है।
कथन II. महावाहिनी के नायक सुग्रीव हैं।
उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपर्युक्त उत्तर का चयन कीजिए
पद्यांश के अनुसार, रघुनंदन का आशय राम से है।
महावाहिनी के नायक सुग्रीव नहीं बल्कि लक्ष्मण हैं।
इसलिए कथन I सही और कथन II गलत है।
दृढ़ आराधना का तात्पर्य कठिन साधना से है
यह पंक्ति सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला जी की है। जिसे भगवान राम को संबोधित किया गया है।
भय – जिसके अंदर भय हो
निर्भय – जिसके अंदर कोई भय न हो
बल, ताकत, सामर्थ्य आदि शक्ति के पर्यायवाची शब्द हैं जबकि उग्र ‘तीव्र’ का और अक्षय ‘अमर’ का पर्यायवाची शब्द है।
‘भल्ल-सैन्य’ का संबंध भालुओं के सेना नायक जाम्बवंत से है।