Correct option is C
सही उत्तर:
(C) शांत रस
व्याख्या: •
'अब लौ नसानी अब न नसैहों' वाक्य में
शांत रस की निष्पत्ति होती है।
इस वाक्य में किसी प्रिय वस्तु या व्यक्ति से मोहभंग का अनुभव हो रहा है, जो शांत रस का प्रमुख लक्षण है। •
शांत रस तब उत्पन्न होता है जब व्यक्ति को संसार की असारता, जीवन के दुख, मृत्यु, जरा, रोग आदि के प्रति जागरूकता होती है और वह किसी वस्तु या व्यक्ति से मोह छोड़ देता है। • शांत रस में
स्थायी भाव के रूप में
निर्वेद (उदासी, मोह का त्याग) और
संचारी भाव के रूप में
संतोष,
आशा,
विश्वास, आदि होते हैं।
विकल्पों का विश्लेषण:
| विकल्प |
व्याख्या |
सही/गलत |
| करुण रस |
करुण रस में शोक, विषाद और दुःख की भावना होती है, जबकि वाक्य में मोहभंग और संतोष की भावना है। |
गलत |
| अद्भुत रस |
अद्भुत रस में विस्मय और आश्चर्य की भावना होती है, लेकिन यहां ऐसा कोई तत्व नहीं है। |
गलत |
| शांत रस |
यह रस मोहभंग, निर्वेद, संसार की असारता, और संतोष की स्थिति को व्यक्त करता है। 'अब लौ नसानी अब न नसैहों' में यही भाव व्यक्त होता है। |
सही |
| वीर रस |
वीर रस में उत्साह, साहस और पराक्रम की भावना होती है, जो इस वाक्य में नहीं है। |
गलत |
रस- • काव्य को पढने से जिस आनंद की अनुभूति होती है अर्थात जिस अनिवर्चनीय भाव का संचार हृदय में होता है, उसी आनंद को रस कहा जाता है।
• रस का विवेचन सर्वप्रथम भरत मुनि ने अपने ग्रन्थ नाट्य शास्त्र में किया था।
• भरत मुनि के अनुसार रसों की संख्या 8 है परन्तु अभिनव गुप्त ने 9 रसों को मान्यता दी है।
अतः अब रसों की संख्या 9 मानी जाती है, श्रृंगार रस में ही वात्सल्य और भक्ति रस भी शामिल हैं।
निष्कर्ष:
· 'अब लौ नसानी अब न नसैहों' वाक्य में मोहभंग और निर्वेद की भावना व्यक्त हो रही है, जो शांत रस का उदाहरण है।
· इसलिए सही उत्तर है: (C) शांत रस