Correct option is B
सही उत्तर: (B) शृंगार रस
उत्तर की व्याख्या:
पंक्ति – "राम को रूप निहारति जानकी कंकन के नग की परछाईं"
इस पंक्ति में सीता जी राम जी के रूप को प्रेमपूर्वक निहार रही हैं, और उनके कंगन के नग (रत्न) में राम का प्रतिबिंब दिख रहा है।
यह दृश्य प्रेम, आकर्षण और सौंदर्य से ओत-प्रोत है, जो कि शृंगार रस की विशेषता है।
इस पंक्ति में सीता जी राम जी के रूप को प्रेमपूर्वक निहार रही हैं, और उनके कंगन के नग (रत्न) में राम का प्रतिबिंब दिख रहा है।
यह दृश्य प्रेम, आकर्षण और सौंदर्य से ओत-प्रोत है, जो कि शृंगार रस की विशेषता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प | सही / गलत | कारण |
|---|---|---|
A. अद्भुत रस | गलत | इसमें चमत्कार या विस्मय होना चाहिए, जो यहाँ नहीं है। |
B. शृंगार रस | सही | प्रेम और सौंदर्य की भावना प्रमुख है – यह शृंगार रस की पहचान है। |
C. वात्सल्य रस | गलत | वात्सल्य रस माता-पिता और संतान के प्रेम को दर्शाता है, यहाँ नहीं है। |
D. शान्त रस | गलत | यहाँ कोई वैराग्य, निर्वेद या शांतिपूर्ण निर्विकल्प स्थिति नहीं है। |
अतिरिक्त जानकारी:
शृंगार रस के दो प्रकार होते हैं:
संयोग शृंगार – जब प्रेमी-प्रेमिका मिलन के क्षणों का वर्णन हो
वियोग शृंगार – जब विरह या दूरी का भाव हो
इस पंक्ति में संयोग शृंगार रस का भाव है।
निष्कर्ष:
इस काव्यांश में राम के रूप का सौंदर्य, सीता का निहारना, और प्रतिबिंब की कल्पना – सभी मिलकर शृंगार रस की अनुभूति कराते हैं।
इसलिए सही उत्तर है – (B) शृंगार रस।