Correct option is A
सही उत्तर: (a) इन्द्रवज्रा
इन्द्रवज्रा छंद के प्रत्येक चरण में दो तगण, एक जगण, और दो गुरु वर्ण होते हैं। यह छंद संस्कृत और हिंदी काव्य रचनाओं में लय और माधुर्य उत्पन्न करने के लिए प्रसिद्ध है।
इन्द्रवज्रा छंद की संरचना:
- तगण (— ।। ।) दो बार।
- जगण (। — ।) एक बार।
- गुरु वर्ण (—) दो बार।
- कुल मात्रा: 11 वर्ण।
उदाहरण:
"देव विष्णु के चरण शरण,
सुर तरु फल देता।"
अतिरिक्त जानकारी:
उपेन्द्रवज्रा:
- इसमें चरण में तगण, तगण, गुरु, और जगण की क्रमिक पुनरावृत्ति होती है।
- यह संरचना इन्द्रवज्रा से भिन्न है।
सवैया:
- सवैया छंद में 24 वर्ण होते हैं।
- इसमें अलग प्रकार की लयबद्धता होती है।
चौपाई:
- चौपाई छंद में प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं।
- इसमें तगण और जगण की संरचना नहीं होती।