Correct option is A
सही उत्तर: (A) - SIS
रगण की संरचना:
गण का नाम | संरचना (मात्राएँ) | लिप्यंतरण |
|---|---|---|
रगण | 2-1-2 | SIS (गुरु-लघु-गुरु) |
रगण का उदाहरण:
"हरिद्वार" (हि-रि-द्वार) → (। ऽ ।) → रगण
"मकरंद" (म-कर-ंद) → (। ऽ ।) → रगण
"मकरंद" (म-कर-ंद) → (। ऽ ।) → रगण
इन शब्दों में पहला और तीसरा वर्ण लघु (।) है, जबकि बीच का वर्ण गुरु (ऽ) है, जिससे यह रगण बनता है।
विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प | संरचना | सही/गलत | कारण |
|---|---|---|---|
A - SIS | गुरु-लघु-गुरु | सही | यह रगण का सही क्रम है। |
B - ISS | लघु-गुरु-गुरु | गलत | यह यगण का क्रम है। |
C - SII | गुरु-लघु-लघु | गलत | यह भगण का क्रम है। |
D - SSI | गुरु-गुरु-लघु | गलत | यह तगण का क्रम है। |
मुख्य बिंदु:
रगण में पहला और तीसरा वर्ण गुरु (ऽ) तथा दूसरा वर्ण लघु (।)) होता है।
इसका क्रम SIS (गुरु-लघु-गुरु) होता है।
रगण वर्णिक छंदों में लय और तालबद्धता बनाए रखने में सहायक होता है।
इसका क्रम SIS (गुरु-लघु-गुरु) होता है।
रगण वर्णिक छंदों में लय और तालबद्धता बनाए रखने में सहायक होता है।
निष्कर्ष:
रगण में पहला और तीसरा वर्ण गुरु (ऽ) तथा दूसरा वर्ण लघु (।)) होता है, जिसका क्रम SIS होता है। सही उत्तर (A) है।
अतिरिक्त जानकारी:
गण:
गण वे तीन-अक्षरीय समूह होते हैं, जो छंद में वर्णों के लघु (।) और गुरु (ऽ) मात्राओं के आधार पर बनाए जाते हैं।
गणों की सूची और याद करने का नियम:
क्रम संख्या | गण का नाम | सूत्रीय नाम | संरचना (मात्राएँ) |
|---|---|---|---|
1 | यगण (य) | यमाता | 1-2-2 (। ऽ ऽ) |
2 | मगण (मा) | मातारा | 2-2-2 (ऽ ऽ ऽ) |
3 | तगण (ता) | ताराज | 2-2-1 (ऽ ऽ ।) |
4 | रगण (रा) | राजभा | 2-1-2 (ऽ । ऽ) |
5 | जगण (ज) | जभान | 1-2-1 (। ऽ ।) |
6 | भगण (भा) | भानस | 2-1-1 (ऽ । ।) |
7 | नगण (न) | नसल | 1-1-1 (। । ।) |
8 | सगण (स) | सलगा | 1-1-2 (। । ऽ) |
गणों को पहचानने की सरल विधि:
यदि किसी शब्द के पहले तीन अक्षरों की मात्राएँ मिलाई जाएँ, तो पता चल सकता है कि वह कौन-से गण में आता है।
मुख्य बिंदु:
गण केवल वर्णिक छंदों में प्रयुक्त होते हैं।
गणों को याद रखने के लिए "यमाताराजभानसलगा" सूत्र उपयोगी होता है।
प्रत्येक गण तीन मात्राओं का समूह होता है, और उनकी पहचान लघु (।) और गुरु (ऽ) के आधार पर होती है।
इनका उपयोग छंद निर्माण में तालबद्धता और लय बनाए रखने के लिए किया जाता है।
गणों को याद रखने के लिए "यमाताराजभानसलगा" सूत्र उपयोगी होता है।
प्रत्येक गण तीन मात्राओं का समूह होता है, और उनकी पहचान लघु (।) और गुरु (ऽ) के आधार पर होती है।
इनका उपयोग छंद निर्माण में तालबद्धता और लय बनाए रखने के लिए किया जाता है।