Correct option is A
भरत का "नाट्यशास्त्र" एक प्रमुख संस्कृत ग्रंथ है, जिसे भारतीय नाट्य, संगीत और अभिनय की नींव माना जाता है। इस ग्रंथ के
28वें अध्याय में विशेष रूप से
"श्रुति" को समर्पित किया गया है।
श्रुति के महत्व को इस अध्याय में स्पष्ट किया गया है, और इसके माध्यम से
संगीत के स्वरों के सूक्ष्म अंतर और उनके प्रभावों पर चर्चा की गई है।
भरत ने
श्रुति को संगीत के बारीक तत्वों में शामिल किया, और यह
नाट्यशास्त्र का एक अहम हिस्सा है, जो संगीत और नृत्य के सिद्धांतों की व्याख्या करता है।
मुख्य बिंदु:
1.
नाट्यशास्त्र और श्रुति:
नाट्यशास्त्र में
श्रुति को
स्वरों के सूक्ष्म अंतर के रूप में माना गया है, जो संगीत की गहराई और गुणवत्ता को स्थापित करता है।
2.
श्रुति का महत्व:
श्रुति को संगीत में
स्वरों के विभिन्न पहलुओं और उनकी
गति को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
3.
संगीत और नृत्य का संबंध:
नाट्यशास्त्र में संगीत और नृत्य के सिद्धांतों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है, जिसमें
श्रुति का केंद्रीय स्थान है।