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एतेषु कथनेषु विचार्यताम् - 1. दाण्डक्यो नाम भोजः कामाद् ब्राह्मणकन्यामभिमन्यमानः सबन्धुराष्ट्रो विननाश। करालश्च वैदेहः। 2. कोपाद् जनमेजयो ब्राह्
Question

एतेषु कथनेषु विचार्यताम् -
1. दाण्डक्यो नाम भोजः कामाद् ब्राह्मणकन्यामभिमन्यमानः सबन्धुराष्ट्रो विननाश। करालश्च वैदेहः।
2. कोपाद् जनमेजयो ब्राह्मणेषु विक्रान्तस्तालजङ्ङ्घश्च भृगुषु।
3. मानाद् दुर्योधनः परदारानप्रयच्छन्। रावणो राज्यादंशं च।
एतेषु कति कथनानि सम्यक् ?

A.

केवलम् एकम्

B.

केवलं द्वे

C.

सर्वे त्रयः

D.

न कश्चित्

Correct option is B


परिचय: यह प्रश्न कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार उन पौराणिक और ऐतिहासिक राजाओं के उदाहरणों से संबंधित है, जो काम, क्रोध , और मान के वशीभूत होकर नष्ट हुए।
व्याख्या:
सही विकल्प (b) केवलं द्वे है। अर्थात्, केवल कथन 1 और कथन 2 सही हैं।
· कथन 1: दाण्डक्यो नाम भोजः कामाद् ब्राह्मणकन्यामभिमन्यमानः सबन्धुराष्ट्रो विननाश। करालश्च वैदेहः।
· अर्थ: दाण्डक्य नाम का भोज राजा ने काम के वशीभूत होकर एक ब्राह्मण कन्या के प्रति दुराचार किया, जिसके कारण वह अपने सगे-संबंधियों और राज्य के साथ नष्ट हो गया। कराल नामक वैदेह राजा भी इसी कारण नष्ट हुआ।
· कौटिल्य का उल्लेख: कौटिल्य ने कामजन्य दुर्गुण के उदाहरण में दाण्डक्य और कराल दोनों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है।
· निष्कर्ष: यह कथन सत्य है।
· कथन 2: कोपाद् जनमेजयो ब्राह्मणेषु विक्रान्तस्तालजङ्ङ्घश्च भृगुषु।
· अर्थ: जनमेजय राजा ने क्रोध के कारण ब्राह्मणों पर अत्याचार किया। इसी प्रकार, तालजङ्घ (हैहय वंश का राजा) ने भी भृगु वंश के ब्राह्मणों पर अत्याचार किया। दोनों क्रोध के कारण विनष्ट हुए।
· कौटिल्य का उल्लेख: कौटिल्य ने क्रोधजन्य दुर्गुण के उदाहरण में जनमेजय और तालजङ्घ दोनों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है।
· निष्कर्ष: यह कथन सत्य है।
· कथन 3: मानाद् दुर्योधनः परदारानप्रयच्छन्। रावणो राज्यादंशं च।
· अर्थ: यह कथन कहता है कि मान (अहंकार) के कारण दुर्योधन ने परदारा (द्रौपदी) को नहीं लौटाया और रावण ने राज्यादंश (राज्य का हिस्सा) भी नहीं दिया (यानी दोनों मान/अहंकारवश नष्ट हुए)।
· कौटिल्य का यथार्थ उल्लेख: कौटिल्य ने मान (अहंकार) के कारण नष्ट होने वाले राजाओं में दुर्योधन और रावण का नाम लिया है।
· दुर्योधन: दुर्योधन ने पाण्डवों को राज्य का अंश न देकर विनाश को प्राप्त किया। यहाँ कथन में उसे परस्त्री हरणएवं उसे मानवश न लौटाने का दोषी बताया है जबकि यह रावण का कार्य था ।
· रावण: रावण का उल्लेख 'सीतापहरण' के कारण विनष्ट होने वालों में आता है जबकि कथन में उसे राज्य अपहरण का सोशी बताया गया है।
· निष्कर्ष: कथन 3, में मानवश रावण और दुर्योधन का विनाश हुआ यह कहना ठीक है परन्तु उनका अपराध एक दूसरे पर आरोपित हुआ है। अतः यह कथन असत्य है।

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