Correct option is D
परिचय
संस्कृत व्याकरण में
सन्धि, समास, और तद्धित प्रमुख प्रक्रियाएँ हैं जिनके द्वारा नए शब्दों का निर्माण होता है या पदों के स्वरूप में परिवर्तन आता है।
व्याख्या
दिए गए तीनों युग्मों में से,
कोई भी युग्म सही नहीं है।
·
(d) किञ्चन अपि युग्मं न समीचीनम् (कोई भी युग्म सही नहीं है)।
गलत युग्मों का विवरण:
1.
सन्धिः : शब्दरूपपरिवर्तनप्रक्रिया
· यह युग्म
गलत है।
·
सन्धि दो
वर्णों के मेल से होने वाला परिवर्तन है (जैसे देव + आलयः = देवालयः)। यह मुख्य रूप से
वर्णविकार है।
·
शब्दरूप परिवर्तन प्रक्रिया को व्याकरण में
सुबन्त या
विभक्ति प्रक्रिया कहते हैं (जैसे राम + सु = रामः; राम + औ = रामौ)।
2.
समासः : धातोः विकाररूपम्
· यह युग्म
गलत है।
·
समास
दो या दो से अधिक पदों (नामपदों) को संक्षिप्त करके
एक पद बनाने की प्रक्रिया है (जैसे राज्ञः पुरुषः = राजपुरुषः)। यह पद-संक्षेपीकरण है।
·
धातु का विकाररूप (धातु में परिवर्तन)
कृत् प्रत्यय या
तिङ् प्रत्यय लगाने से होता है (जैसे
कृ +
तिच् =
कृतिः;
गम् +
तिप् =
गच्छति)।
3.
तद्धितः : नामधातोः व्युत्पन्नः शब्दः
· यह युग्म
गलत है।
·
तद्धित प्रत्यय
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि
नामपदों (प्रातिपदिकों) से नए शब्द बनाने की प्रक्रिया है (जैसे दशरथ + अण् = दाशरथिः)। यह
नामपद से व्युत्पन्न होता है।
·
नामधातु वह क्रिया (धातु) होती है जो किसी
नामपद से बनाई जाती है (जैसे
पुत्रम् +
इच्छति =
पुत्रीयति)। इस प्रक्रिया को
नामधातु प्रक्रिया कहते हैं।
रोचक तथ्य
· (a), (b), (c) विकल्प उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर गलत सिद्ध होते हैं।
·
संस्कृत व्याकरण में शब्द-उत्पादन के मुख्य तीन मार्ग हैं:
·
कृत् प्रत्यय (धातु + कृत् = कृदन्त पद)
·
तद्धित प्रत्यय (नामपद + तद्धित = तद्धितान्त पद)
·
समास (दो या अधिक पद + समास = सामासिक पद)
· इन तीनों से बने पदों को
'वृत्ति' कहा जाता है।