Correct option is B
सहजात/प्रथम भाषा का ज्ञान द्वितीय भाषा के अधिगम को समर्थित करता है।यह सिद्ध हो चुका है कि पहली भाषा (L1) के ज्ञान से दूसरी भाषा (L2) सीखने की प्रक्रिया आसान हो जाती है। पहली भाषा में अर्जित शब्दावली, व्याकरणिक संरचना, और संचार कौशल दूसरी भाषा के अधिगम में सहायक सिद्ध होते हैं। इससे भाषा के संरचनात्मक और ध्वन्यात्मक पहलुओं में समानता ढूंढने में भी मदद मिलती है, जिससे द्वितीय भाषा सीखना अधिक प्रभावी और तेज हो जाता है।
- मूलभूत संरचना: प्रथम भाषा में सीखे गए व्याकरणिक नियम और संरचना द्वितीय भाषा में भी सहायक होती है।
- शब्दावली का स्थानांतरण: कई शब्दों और वाक्यांशों का अर्थ और प्रयोग दूसरी भाषा में सीखने में सहायता करता है।
- भाषाई जागरूकता: पहली भाषा में पाई गई भाषाई जागरूकता दूसरी भाषा के अधिगम में उपयोगी होती है।
- संज्ञात्मक कौशल: पहली भाषा के अधिगम से मिले संज्ञानात्मक कौशल, जैसे याद रखने, विश्लेषण करने, तुलना करने के गुण, दूसरी भाषा सीखने में मदद करते हैं।
- ध्वनि और उच्चारण की समानता: पहली भाषा में अर्जित ध्वनि और उच्चारण के अनुभव दूसरी भाषा के उच्चारण में सहायक हो सकते हैं।
Information Booster
- सहायकता का सिद्धांत: पहली भाषा का ज्ञान दूसरी भाषा सीखने में सहायक होता है क्योंकि मूलभूत संरचनाओं का उपयोग किया जा सकता है।
- भाषाई अंतरण: इसमें शब्दावली और ध्वनि का अंतरण होता है जो सीखने में गति लाता है।
- अनुभव की समानता: पहली भाषा के अनुभवों का प्रयोग दूसरी भाषा में आसानी से होता है, जिससे भाषाई संचार कौशल में वृद्धि होती है।
- संवेदनशीलता: पहली भाषा में संवेदनशीलता और पहचान बढ़ाने से दूसरी भाषा में उच्चारण और समझ में सहायता मिलती है।
- शिक्षण में समर्थन: द्वितीय भाषा अधिगम में सहजात भाषा का ज्ञान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अधिगम प्रक्रिया को अधिक सहज बनाता है।
Additional Knowledge
- प्रथम भाषा के ज्ञान का द्वितीय भाषा से संबंध नहीं होना: यह कथन गलत है क्योंकि पहली भाषा का ज्ञान दूसरी भाषा सीखने में सहायक होता है।
- प्रथम और द्वितीय भाषा अधिगम का पूरी तरह से अलग होना: यह सही नहीं है, क्योंकि दोनों में संरचनात्मक और संज्ञानात्मक अंतरण होता है।
- प्रथम भाषा का ज्ञान द्वितीय भाषा में अवरोध डालना: यह गलत है क्योंकि आमतौर पर पहली भाषा का ज्ञान दूसरी भाषा सीखने में सहायक ही होता है, जब तक कि दोनों भाषाओं में स्पष्ट संरचनात्मक अंतर न हो।