Correct option is C
परिचय:
महाभारत महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य और इतिहास ग्रन्थ है। प्रत्येक शुभ ग्रन्थ के आरम्भ में
मङ्गलाचरण (स्तुति) का विधान होता है।
व्याख्या:
सही उत्तर
(c) I सत्यम् परन्तु II असत्यम् है।
कथन I का विश्लेषण (सत्य)
कथनम् I: 'नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्' अयं श्लोकः महाभारतस्य मङ्गलाचरणमस्ति।
· यह कथन
सत्य है।
·
महाभारत का यह प्रसिद्ध श्लोक
मङ्गलाचरण के रूप में स्वीकृत है, जिसका उल्लेख प्रायः ग्रन्थ के आरंभ में किया जाता है:
नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।
देवीं सरस्वतीं चैव ततो जयमुदीरयेत्॥
· इस श्लोक में
नारायण (ईश्वर),
नर (अर्जुन),
नरोत्तम (वेदव्यास/भीष्म/कृष्ण) और
सरस्वती देवी को नमस्कार करके
'जय' (महाभारत का पूर्व नाम) का उच्चारण करने को कहा गया है। यह
आशीर्वादात्मक मङ्गलाचरण है।
कथन II का विश्लेषण (असत्य)
कथनम् II: महाभारतस्य मङ्गलाचरणे 'महाभारतम्' इति नामोऽल्लेखो वर्तते।
· यह कथन
असत्य है।
· उपर्युक्त मङ्गलाचरण श्लोक में
'महाभारतम्' नाम का उल्लेख
नहीं है। वहाँ
'जय' शब्द का प्रयोग है:
'ततो जयमुदीरयेत्' (उसके बाद 'जय' का उच्चारण करना चाहिए)।
· विद्वानों के अनुसार, महाभारत का प्रारम्भिक नाम
'जय' था, जिसमें
8,800 श्लोक थे। बाद में इसका नाम
'भारत' (24,000 श्लोक) पड़ा, और अंततः यह
'महाभारत' (लगभग 1,00,000 श्लोक) के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
अतः, मङ्गलाचरण में केवल
'जय' नाम का संकेत है, न कि 'महाभारतम्' का सीधा उल्लेख।