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सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:                      सूची-I       
Question

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:                      

सूची-I                                                                                                 सूची-2
A. मिलन के पल केवल दो-चार, विरह के कल्प अगार!                        प्रियप्रवास

B. तुम भूल गए पुरुषत्व-मोह में कुछ सत्ता है नारी की!                         सांध्यगीत 

C. सिंधु की निःसीमता पर लघु लहर का लास कैसा!                              कामायनी 
दीप लघु शिर पर धरे आलोक का आकाश कैसा!
D. उपल वृष्टि हुई तम छा गया पट गई महि कंकड़-पात से।                   परिवर्तन 

A.

A-4,B-3,C-2,D-1

B.

A-1,B-2,C-3,D-4

C.

A-4,B-2,C-3,D-1

D.

A-3,B-1,C-4,2

Correct option is A

सही ऊतर तालिका यही है - 




                                                                                                                                              सूची-I




                                             सूची-II
A. मिलन के पल केवल दो-चार, विरह के कल्प अगार!                                  
                                                      परिवर्तन
 B. तुम भूल गए पुरुषत्व-मोह में कुछ सत्ता है नारी की!                                
                                                        कामायनी
C. सिंधु की निःसीमता पर लघु लहर का लास कैसा! दीप लघु शिर पर धरे आलोक का आकाश कै
                                                  सांध्य गीत 
                         D. उपल वृष्टि हुई तम छा गया पट गई महि कंकड़-पात से।                                                                                              
                                                                     प्रियप्रवास 

 Information Booster:

a- मिलन के पल केवल दो-चार, विरह के कल्प अगार 

प्रस्तुत पंकितया सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित परिवर्तन जो की एक लंबी कविता है से उद्धृत है । 

B. तुम भूल गए पुरुषत्व-मोह में कुछ सत्ता है नारी की!

प्रस्तुत पंक्ति जयशंकरप्रसाद द्वारा रचित कामायनी महाकाव्य के इड़ा सर्ग से ली गई है । 

C. सिंधु की निःसीमता पर लघु लहर का लास कैसा!दीप लघु शिर पर धरे आलोक का आकाश कैसा!

प्रस्तुत पंक्ति महादेवी वर्मा द्वारा रचित फिर विकल है प्राण मेरे से ली गई है 

D. उपल वृष्टि हुई तम छा गया पट गई महि कंकड़-पात से।

यह पंक्ति अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध के महाकव्य प्रियप्रवास से ली गई है ,प्रियप्रवास खड़ी बोली का प्रथम महाकव्य है । 

Additional Knowledge : 

छयवाद के चार स्तंभों की प्रमुख काव्य रचनाएं -

1. जयशंकर प्रसाद:

प्रसाद जी की रचनाएँ गहन भावनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण हैं। उनकी कुछ प्रमुख कविताएँ हैं:

  • कामायनी: यह महाकाव्य मानव मनोविज्ञान और दर्शन का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें श्रद्धा, इड़ा, और मनु के माध्यम से मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं का चित्रण किया गया है।

  • आँसू: यह काव्य संग्रह विरह और वेदना की गहन अनुभूतियों को व्यक्त करता है, जिसे 'हिंदी का मेघदूत' भी कहा जाता है।

  • लहर: इस संग्रह में प्रसाद जी की गीतात्मक कविताएँ संकलित हैं, जो प्रकृति और मानव जीवन के विविध रंगों को दर्शाती हैं।

2. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला':

निराला जी की कविताएँ स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, और मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति हैं। उनकी कुछ प्रसिद्ध कविताएँ हैं:

  • राम की शक्तिपूजा: यह कविता राम के आत्मसंघर्ष और शक्ति की उपासना के माध्यम से मानव की आंतरिक शक्ति को उजागर करती है।

  • वह तोड़ती पत्थर: इस कविता में एक मेहनतकश महिला के संघर्षमय जीवन का सजीव चित्रण है।

  • सरोज स्मृति: यह कविता निराला जी की पुत्री सरोज की स्मृति में लिखी गई है, जिसमें उनकी व्यक्तिगत वेदना प्रकट होती है।

3. सुमित्रानंदन पंत:

पंत जी की कविताएँ प्रकृति प्रेम, सौंदर्य, और मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत हैं। उनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं:

  • पल्लव: इस संग्रह में प्रकृति और मानव जीवन के विविध पहलुओं का सुंदर चित्रण है।

  • गुंजन: यह काव्य संग्रह मानवीय भावनाओं और प्राकृतिक सौंदर्य का समन्वय प्रस्तुत करता है।

  • युगांत: इस संग्रह में पंत जी ने सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों को कविताओं के माध्यम से व्यक्त किया है।

4. महादेवी वर्मा:

महादेवी जी की कविताएँ वेदना, करुणा, और आध्यात्मिकता की गहराइयों को स्पर्श करती हैं। उनकी कुछ प्रसिद्ध कविताएँ हैं:

  • नीरजा: यह काव्य संग्रह उनकी वेदनापूर्ण कविताओं का संकलन है, जिसमें आत्मा की पुकार है।

  • सांध्यगीत: इस संग्रह में संध्या समय की भावनाओं और अनुभूतियों का मार्मिक चित्रण है।

  • दीपशिखा: यह संग्रह उनकी दार्शनिक और आध्यात्मिक कविताओं का प्रतिनिधित्व करता है।

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