Correct option is D
वैराग्य और संतोष:
- शांत रस में वैराग्य का भाव प्रमुख होता है। इसमें सांसारिक मोह-माया से मुक्त होकर संतोष और शांति का चित्रण किया जाता है।
परहित की भावना:
- कवि का मन सदा परोपकार और शुभ कार्यों में लगा रहता है।
निर्वेद (उदासीनता):
- सांसारिक सुखों और भोगों से विरक्त होकर आत्मिक शांति की ओर जाने का भाव।
ईश्वर की कृपा और संत स्वभाव:
- शांत रस में ईश्वर के प्रति समर्पण और संतों के स्वभाव का अनुसरण भी देखने को मिलता है।
"कबहुँक हों यहि रहनि रहौंगो"
- कवि इस पंक्ति में यह कहता है कि मैं सदा इसी प्रकार के शांत और संत स्वभाव में रहूँगा।
"श्री रघुनाथ कृपालु कृपा ते संत सुभाव गहोंगो।"
- कवि ईश्वर (श्री रघुनाथ) की कृपा से संतों जैसा स्वभाव धारण करने की बात करता है। यह भाव वैराग्य और ईश्वर के प्रति समर्पण को प्रकट करता है।
"जथा लाभ संतोष सदा काहूँ सो कछु न चहौंगो।"
- कवि संतोष के भाव को अपनाने की बात करता है। जो भी उसे मिलेगा, उसमें वह संतुष्ट रहेगा और अधिक की कामना नहीं करेगा।
"परहित निरत निरंतर मन-क्रम-वचन नेम निवहोंगो।"
- कवि परोपकार में निरंतर मन, वचन और कर्म से समर्पित रहने का संकल्प लेता है।
इन सभी पंक्तियों में वैराग्य, संतोष, ईश्वर कृपा, और परोपकार जैसे शांत रस के मुख्य भाव स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
- "निर्वेद" (वैराग्य या उदासीनता)।
शांत रस का उदाहरण:
"मनुज जन्म दुर्लभ कहि गावत, ललचावत क्यों पर।
लौंकिक सुख अविरल दुखदाई, जानत नहीं हिय हर।""सुख की चाह नहीं, दुख का भय नहीं।
सदा संतोष में रहूँ, ईश कृपा में लीन।"
A भयानक रस:
- इसमें भय और आतंक का भाव होता है।
- उदाहरण: भूत-प्रेत, युद्ध में भय।
B वीर रस:
- इसमें पराक्रम, उत्साह और शौर्य का भाव होता है।
- उदाहरण: रणभूमि का वर्णन।
C रौद्र रस:
- इसमें क्रोध और आक्रोश का भाव प्रकट होता है।
- उदाहरण: दुश्मन पर आक्रोश व्यक्त करना।
अतः सही उत्तर है: D शांत रस।
रस का नाम | स्थायी भाव |
|---|---|
शृंगार रस | रति |
हास्य रस | हास, हँसी |
वीर रस | उत्साह |
करुण रस | शोक |
शांत रस | निर्वेद, उदासीनता |
अद्भुत रस | विस्मय, आश्चर्य |
भयानक रस | भय |
रौद्र रस | क्रोध |
बीभत्स रस | जुगुप्सा |
वात्सल्य रस | वात्सल्यता, अनुराग |
भक्ति रस | देव रति |