Correct option is D
सही उत्तर: (D) चम्पूकाव्य
व्याख्या:
चम्पूकाव्य वह काव्य है जिसमें गद्य और पद्य दोनों का समावेश होता है। यह एक विशिष्ट साहित्यिक शैली है जिसमें गद्य और पद्य का मिश्रण कर कथ्य को प्रस्तुत किया जाता है।
विशेषताएँ:
- चम्पूकाव्य में गद्य और पद्य का समन्वय होता है।
- यह शैली संस्कृत साहित्य में अधिक प्रचलित है।
- इसका उद्देश्य कथा को गद्य और पद्य के माध्यम से प्रभावी रूप से प्रस्तुत करना है।
विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प | अर्थ | सही या गलत | स्पष्टीकरण |
|---|---|---|---|
A) रचना | साहित्यिक या कलात्मक कृति। | गलत | यह सामान्य शब्द है, जो गद्य-पद्य दोनों को नहीं दर्शाता। |
B) महाकाव्य | बड़ी और विस्तृत काव्य रचना। | गलत | यह केवल पद्य के रूप में होता है, गद्य और पद्य दोनों का मिश्रण नहीं। |
C) गद्य-पद्य | गद्य और पद्य दोनों का संदर्भ। | गलत | यह एक सामान्य शब्द है, न कि काव्य शैली। |
D) चम्पूकाव्य | गद्य और पद्य दोनों का सम्मिलित काव्य। | सही | यह सही शब्द है, क्योंकि यह गद्य और पद्य के मिश्रण से निर्मित काव्य को दर्शाता है। |
महत्वपूर्ण बिंदु:
- चम्पूकाव्य मुख्यतः संस्कृत साहित्य में प्रचलित है।
- प्रसिद्ध चम्पूकाव्य रचनाएँ:
- भोजप्रबंध
- नलचम्पू
निष्कर्ष:
गद्य और पद्य दोनों का समावेश रखने वाले काव्य को चम्पूकाव्य कहते हैं।
सही उत्तर: (D) चम्पूकाव्य।
गद्य और पद्य दोनों का समावेश रखने वाले काव्य को चम्पूकाव्य कहते हैं।
सही उत्तर: (D) चम्पूकाव्य।