Correct option is D
अधिकरण कारक का प्रयोग किसी क्रिया के होने के स्थान या स्थिति को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
विकल्प | विभक्ति चिह्न | कारक का प्रकार | विश्लेषण |
|---|---|---|---|
(A) | "से, तक" | अपादान और सम्प्रदान कारक | "से" अपादान का चिह्न है और "तक" सम्प्रदान का चिह्न है। यह अधिकरण से भिन्न है। |
(B) | "अरे" | संबोधन सूचक | "अरे" का प्रयोग संबोधन के लिए किया जाता है, विभक्ति चिह्न नहीं है। |
(C) | "का, के" | सम्बन्ध कारक | "का, के" का प्रयोग सम्बन्ध को दर्शाता है, जो अधिकरण नहीं है। |
कारक | संकेत/चिन्ह | परिभाषा | उदाहरण |
कर्ता कारक | 'ने' | संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से क्रिया करने वाले का बोध हो, उसे कर्ता कारक कहते हैं। | रमेश ने पुस्तक पढ़ी।, मोहन ने पत्र लिखा। |
कर्म कारक | 'को' | संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप पर क्रिया का प्रभाव या फल पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं। | उसने सुनील को पढ़ाया।, मोहन ने चोर को पकड़ा। |
करण कारक | 'से', 'द्वारा' | जिस साधन से अथवा जिसके द्वारा क्रिया पूरी की जाती है, उसे करण कारक कहते हैं। | रहीम गेंद से खेलता है।, आदमी चोर को लाठी द्वारा मारता है। |
सम्प्रदान कारक | 'को' (के लिए) | जिस व्यक्ति के लिए क्रिया की जाती है, उसे सम्प्रदान कारक कहते हैं। | सुनील रवि के लिए गेंद लाता है।, माँ बच्चे को खिलौना देती है। |
अपादान कारक | 'से' | जिस संज्ञा या सर्वनाम से किसी वस्तु का अलग होना या उस पर से किसी चीज का हटना मालूम होता है। | गंगा हिमालय से निकलती है।, वृक्ष से पत्ता गिरता है। |
सम्बन्ध कारक | 'का', 'की', 'के' | संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से एक वस्तु का सम्बन्ध दूसरी वस्तु से जाना जाता है। | राहुल की किताब मेज पर है।, सुनीता का घर दूर है। |
अधिकरण कारक | 'में', 'पर' | संज्ञा के जिस रूप से क्रिया के आधार का बोध होता है, उसे अधिकरण कारक कहते हैं। | घर पर माँ है।, सड़क पर गाड़ी खड़ी है। |
सम्बोधन कारक | कोई चिन्ह नहीं | संज्ञा या जिस रूप से किसी को पुकारने तथा सावधान करने का बोध होता है, उसे सम्बोधन कारक कहते हैं। | रमा! देखो कैसा सुन्दर दृश्य है।, खबरदार! |
अधिकरण कारक स्थान और स्थिति के संदर्भ में होता है, और इसके विभक्ति चिह्न "में" और "पर" होते हैं।