Correct option is D
ans. (d)
अमृतलाल नागर हिंदी साहित्य के प्रमुख उपन्यासकारों में से एक थे। उनके द्वारा रचित प्रमुख उपन्यासों में शामिल हैं:
एकदा नैमिषारण्ये: यह उपन्यास 1972 में प्रकाशित हुआ, जिसमें सम्राट सम्राट चंद्रगुप्त के समय के जनजीवन और सांस्कृतिक पहलुओं को उजागर करता है, जिसमें व्यास, नारद और गणपति जैसे पात्रों को नए रूप में प्रस्तुत किया गया है
शतरंज के मोहरे: 1958 में प्रकाशित इस उपन्यास की पृष्ठभूमि अवध है, जो 1820 से 1837 के बीच लखनऊ के नवाबों के शासन पर केंद्रित है।
वहीं, "सीमाएं टूटती हैं" और "कथा कहो उर्वशी" उपन्यास अमृतलाल नागर की रचनाओं में शामिल नहीं हैं।
Information Booster:
अमृतलाल नागर (17 अगस्त 1916 – 23 फरवरी 1990) हिंदी साहित्य के प्रमुख साहित्यकारों में से एक थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के गोकुलपुरा गाँव में एक गुजराती नागर ब्राह्मण परिवार में हुआ था। आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्होंने हाईस्कूल तक ही औपचारिक शिक्षा प्राप्त की, लेकिन स्वाध्याय के माध्यम से हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, मराठी, और गुजराती भाषाओं में दक्षता हासिल की। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक, व्यंग्य, और बाल साहित्य सहित विभिन्न विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत भारती सम्मान, और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
अमृतलाल नागर के उपन्यासों का एक-एक पंक्ति में विवरण:
महाकाल (1947): 1943 के बंगाल के भीषण अकाल की विभीषिका को दर्शाता उपन्यास।
सेठ बांकेमल (1955): परंपरा और आधुनिकता के बीच संघर्ष को व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत करता है।
बूँद और समुद्र (1956): लखनऊ के चौक मुहल्ले के माध्यम से समाज की जीवंत तस्वीर पेश करता है।
शतरंज के मोहरे (1958): 1820-1837 के अवध के नवाबी दौर की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों का चित्रण।
सुहाग के नूपुर (1960): प्राचीन तमिल महाकाव्य 'शिलप्पदिकारम' पर आधारित प्रेम और त्याग की कहानी।
अमृत और विष (1966): जीवन के संघर्षों को समुद्र मंथन के रूपक से प्रस्तुत करता है।
सात घूँघट वाला मुखड़ा (1968): बेगम समरू के जीवन पर आधारित ऐतिहासिक उपन्यास।
एकदा नैमिषारण्ये (1968): सम्राट चंद्रगुप्त के समय के जनजीवन और सांस्कृतिक पहलुओं का वर्णन।
मानस का हंस (1971): महाकवि तुलसीदास की जीवनी पर आधारित उपन्यास।
नाच्यौ बहुत गोपाल (1978): मेहतर जाति के संघर्षों और सामाजिक स्थिति का चित्रण।
खंजन नयन (1981): महाकवि सूरदास के जीवन पर आधारित कथा।
बिखरे तिनके (1982): सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने की कहानी।
अग्निगर्भा (1983): समाज में व्याप्त बुराइयों और संघर्षों का चित्रण।
करवट (1985): समाज में परिवर्तन और उसकी चुनौतियों पर आधारित।
पीढ़ियाँ (1990): विभिन्न पीढ़ियों के बीच के संबंधों और संघर्षों की कहानी।
Additional Knowledge :
सीमाएं टूटती हैं" और "कथा कहो उर्वशी" हिंदी साहित्य के दो प्रमुख उपन्यास हैं, जो क्रमशः श्रीलाल शुक्ल और देवेन्द्र सत्यार्थी द्वारा रचित हैं।
"सीमाएं टूटती हैं": यह उपन्यास 1973 में प्रकाशित हुआ और इसके लेखक श्रीलाल शुक्ल हैं। श्रीलाल शुक्ल हिंदी साहित्य में सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर आधारित अपने व्यंग्यात्मक लेखन के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी अन्य प्रमुख कृतियों में "राग दरबारी" शामिल है, जो भारतीय ग्रामीण जीवन और राजनीति का सजीव चित्रण करती है।
"कथा कहो उर्वशी": यह उपन्यास 1961 में प्रकाशित हुआ और इसके लेखक देवेन्द्र सत्यार्थी हैं। सत्यार्थी जी के उपन्यासों में लोक संस्कृति की गंगा बहती है। "कथा कहो उर्वशी" उड़ीसा के धौली गाँव के मूर्तिकारों की कथा कहता है, जिसमें कला के मूलभूत प्रश्नों को समय और जिंदगी के बड़े कैनवस पर रखकर देखा गया है।