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अज्ञेय' के उपन्यासों के पात्रों में से भुवन और सरस्वती शामिल हैं।
भुवन: अज्ञेय के उपन्यास 'नदी के द्वीप' का प्रमुख पात्र है।
सरस्वती: उपन्यास 'शेखर: एक जीवनी' में शेखर की बहन के रूप में प्रस्तुत की गई है।
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' हिंदी साहित्य के प्रमुख साहित्यकारों में से एक हैं, जिन्होंने अपने उपन्यासों में गहन मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक विषयों का समावेश किया है। उनके उपन्यासों के प्रमुख पात्रों का विवरण निम्नलिखित है:
Information Booster:
1. शेखर: एक जीवनी
यह उपन्यास आत्मकथात्मक शैली में लिखा गया है, जिसमें मुख्य पात्र शेखर है। शेखर एक विद्रोही स्वभाव का युवक है, जो समाज की रूढ़िवादिता और परंपराओं के खिलाफ संघर्ष करता है। अन्य प्रमुख पात्र हैं:
सरस्वती: शेखर की बहन, जो उसकी प्रेरणा और मार्गदर्शक है।
शारदा: मद्रासी परिवार की लड़की, जिसकी चंचलता और स्पष्टवादिता शेखर को आकर्षित करती है।
शशि: शेखर की मौसेरी बहन, जिसके प्रति शेखर आकर्षित होता है। वह संघर्षशील और बहादुर नारी के रूप में प्रस्तुत है।
2. नदी के द्वीप
इस उपन्यास में प्रेम त्रिकोण की कहानी है, जिसमें प्रमुख पात्र हैं:
भुवन: एक संवेदनशील और विचारशील व्यक्ति, जो अपने अस्तित्व और प्रेम के बीच संघर्ष करता है।
रेखा: स्वतंत्र विचारों वाली महिला, जो क्षणवादी जीवन दृष्टिकोण रखती है।
गौरा: पारंपरिक विचारों की प्रतिनिधि, जो भुवन से प्रेम करती है।
3. अपने-अपने अजनबी
यह उपन्यास मृत्यु के भय और जीवन के अर्थ की खोज पर केंद्रित है। प्रमुख पात्र हैं:
योके: जापानी महिला, जो जीवन और मृत्यु के बीच संतुलन खोजती है।
सेल्मा: पश्चिमी संस्कृति की प्रतिनिधि, जो अपने अस्तित्व की खोज में है।
पाल: जीवन के अर्थ की तलाश में भटकता हुआ व्यक्ति।
यान: मृत्यु के भय से ग्रस्त व्यक्ति, जो जीवन के प्रति निराशावादी दृष्टिकोण रखता है।
जग्गनाथन: भारतीय मूल का व्यक्ति, जो पारंपरिक और आधुनिक विचारों के बीच संघर्ष करता है।
Additional Knowledge :
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (7 मार्च 1911 – 4 अप्रैल 1987) हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि, उपन्यासकार, निबंधकार, पत्रकार और संपादक थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक पुरातात्विक शिविर में हुआ था, जहाँ उनके पिता, डॉ. हीरानंद शास्त्री, एक प्रसिद्ध पुरातत्वविद् थे।
साहित्यिक योगदान
अज्ञेय को हिंदी कविता में 'प्रयोगवाद' का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने 'तार सप्तक' (1943) और 'दूसरा सप्तक' (1951) का संपादन किया, जो हिंदी कविता में नई प्रवृत्तियों की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। उनकी प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित हैं:
कविता संग्रह:
- भग्नदूत (1933)
- चिंता (1942)
- हरी घास पर क्षण भर (1949)
- बावरा अहेरी (1954)
- आँगन के पार द्वार (1961)
- कितनी नावों में कितनी बार (1967)
उपन्यास:
- शेखर: एक जीवनी (दो भाग, क्रमशः 1941, 1944)
- नदी के द्वीप (1951)
- अपने-अपने अजनबी (1961)
कहानी संग्रह:
- विपथगा (1937)
- परंपरा (1944)
- कोठरी की बात (1945)
निबंध संग्रह:
- सबरंग
- त्रिशंकु (1945)
- आत्मनेपद (1960)
- 1964 में, उन्हें 'आँगन के पार द्वार' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- 1978 में, 'कितनी नावों में कितनी बार' के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ।
संपादन कार्य
अज्ञेय ने 'प्रतीक', 'दिनमान', 'नवभारत टाइम्स', 'वाक्' और 'एवरीमैन' जैसी प्रमुख पत्रिकाओं का संपादन किया, जिससे हिंदी पत्रकारिता और साहित्य को नई दिशा मिली।