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    बच्चन सिंह के अनुसार, 'परिवर्तन' कविता से संबंधित सही तथ्य कौन से हैं?जीवन की संकुलता और परिवर्तन की द्वंद्वात्मकता ने इस कविता के रूप-विधान को ज
    Question

    बच्चन सिंह के अनुसार, 'परिवर्तन' कविता से संबंधित सही तथ्य कौन से हैं?

    1. जीवन की संकुलता और परिवर्तन की द्वंद्वात्मकता ने इस कविता के रूप-विधान को जटिल और प्रभावशाली बना दिया है।
    2. 'परिवर्तन' में एक ही लय का प्रयोग किया गया है।
    3. इसमें कहीं-कहीं संस्कृत की तत्सम शब्दावली के द्वारा परिवर्तन के भयंकर रूपाकार का चित्रण किया गया है।
    4. कवि परिवर्तन का स्वागत करना नहीं चाहता है।

    नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-

    A.

    1 और 4

    B.

    2 और 3

    C.

     1 और 3

    D.

    2 और 4

    Correct option is C

    ans.(c) 1और 3 

    बच्चन सिंह के अनुसार, 'परिवर्तन' कविता का मुख्य भाव जीवन की जटिलता और परिवर्तन की द्वंद्वात्मकता के इर्द-गिर्द घूमता है। कविता में निम्नलिखित पहलू प्रमुख हैं:

    1. जीवन की संकुलता और परिवर्तन की द्वंद्वात्मकता:
      यह कविता जीवन और परिवर्तन के बीच के द्वंद्व को गहराई से प्रस्तुत करती है। यह द्वंद्व कविता के रूप और विचारों को जटिल लेकिन प्रभावशाली बनाता है।

    2. संस्कृत की तत्सम शब्दावली का प्रयोग:
      संस्कृत के तत्सम शब्दों का उपयोग कविता में परिवर्तन के भयंकर और विशाल स्वरूप को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करता है।

      Information Booster:

      सुमित्रानंदन पंत की कविता 'परिवर्तन' 1924 में रचित एक लंबी कविता है, जो उनके काव्य संग्रह 'पल्लव' में संकलित है।

      इस कविता में पंत ने परिवर्तन को एक विराट और विश्वव्यापी शक्ति के रूप में चित्रित किया है, जो जीवन की संकुलता और परिवर्तन की द्वंद्वात्मकता को उजागर करती है।

      कविता का सारांश:

      कविता में पंत ने परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया है:

      1. प्रकृति का परिवर्तन: कवि ने प्रकृति में होने वाले निरंतर परिवर्तनों को दर्शाया है, जैसे ऋतुओं का बदलना, दिन-रात का क्रम, और जीवन-मृत्यु का चक्र।

      2. सामाजिक परिवर्तन: समाज में होने वाले उत्थान-पतन, युद्ध, शांति, संस्कृति और सभ्यता के विकास और पतन को भी कवि ने अपने शब्दों में पिरोया है।

      3. व्यक्तिगत परिवर्तन: मनुष्य के जीवन में आने वाले सुख-दुःख, आशा-निराशा, प्रेम-विरह आदि भावनाओं के परिवर्तन को भी कविता में स्थान मिला है।

    3. काव्यगत विशेषताएँ:

      • भाषा: कविता में संस्कृतनिष्ठ हिंदी का प्रयोग किया गया है, जो उसकी गंभीरता और प्रभावशीलता को बढ़ाता है।

      • छंद: 'परिवर्तन' कविता रोला छंद में रचित है, जो इसकी लयबद्धता को सुनिश्चित करता है।

      • अलंकार: कविता में रूपक, उपमा, मानवीकरण आदि अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है, जो चित्रात्मकता को बढ़ाते हैं।

      महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ:

      • महाकवि निराला ने 'परिवर्तन' कविता की प्रशंसा करते हुए कहा है कि यह किसी भी बड़े कवि को कविता से निस्संकोच मैत्री करा सकती है।

      • स्वयं पंत जी ने स्वीकारा है कि 'पल्लव' की छोटी-बड़ी अनेक रचनाओं में 'परिवर्तन' शीर्षक कविता उनके उस काल के हार्दिक, वैयक्तिक, बौद्धिक संघर्षों का विशाल दर्पण-सी बन गई है।

    Additional Knowledge:

    बच्चन सिंह (2 जुलाई 1919 – 5 अप्रैल 2008) हिंदी साहित्य के एक प्रमुख आलोचक, इतिहासकार और साहित्यकार थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के भदवार (भद्रसेनपुर) गाँव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा जौनपुर में पूर्ण करने के बाद, उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से उच्च शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के उपरांत, उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्यापन किया और नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी की प्रबंध समिति के सदस्य एवं पदाधिकारी रहे। उन्होंने 'नागरी प्रचारिणी पत्रिका' का लगभग एक दशक तक अवैतनिक संपादन भी किया।

    प्रमुख कृतियाँ:

    बच्चन सिंह ने हिंदी साहित्य में आलोचना, इतिहास और कहानी संग्रह के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:

    • आलोचना:

      • क्रांतिकारी कवि निराला (1947)
      • भारतेंदु की कविता (1951)
      • हिंदी नाटक (1954)
      • रीतिकालीन कवियों की प्रेम व्यंजना (1956)
      • बिहारी का नया मूल्यांकन (1957)
      • आलोचक और आलोचना (1970)
      • आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास (1978)
      • हिंदी आलोचना के बीज शब्द (1983)
      • साहित्य का समाजशास्त्र (1984)
      • भारतीय और पाश्चात्य काव्यशास्त्र का तुलनात्मक अध्ययन (1987)
      • आचार्य शुक्ल का इतिहास पढ़ते हुए (1989)
      • कथाकार जैनेन्द्र (1993)
      • हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास (1996)
      • कविता का शुक्ल पक्ष (2001)
      • निराला का काव्य (2005)
      • उपन्यास का काव्यशास्त्र (2008)
      • महाभारत की संरचना (2008)
      • निराला काव्य कोश (2008)
      • साहित्यिक निबंध: आधुनिक दृष्टिकोण (2008)
    • कहानी संग्रह:

      • लहरें और कगार (1960)
      • सूतो वा सूत पुत्रोवा (1998)
      • पांचाली (2001)
      • कई चेहरों के बाद (2008)

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