Correct option is A
सही उत्तर है:
A. संयोग रस
A. संयोग रस
विवरण:
इन पंक्तियों में संयोग रस का वर्णन है। गोपियों और कृष्ण के बीच प्रेम की अनुभूति, हास-परिहास और लालित्य से परिपूर्ण संवाद इस पंक्ति में है। यह संवाद श्रृंगार रस का एक उपभेद, अर्थात संयोग रस को दर्शाता है।
व्याख्या:
- बत रस लालच लाल की: गोपियाँ कृष्ण से बातचीत का आनंद लेने के लिए लालायित हैं।
- मुरलीधरी लुका: कृष्ण ने अपनी मुरली को छुपा लिया है, जो गोपियों के बीच कौतूहल और आकर्षण उत्पन्न करता है।
- सौंह करे भौहान हँसे: गोपियाँ नाराजगी का नाटक करते हुए हास-परिहास करती हैं।
- दैन कहे नटि जाय: यह गोपियों की शिकायत और संयोग की लालसा को व्यक्त करता है।
Key Points:
● संयोग रस में नायक-नायिका के मिलन की स्थिति का वर्णन होता है।
● इसका स्थायी भाव रति है।
● यह रस श्रृंगार रस का एक उपभेद है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- हास्य रस:
हास्य रस में हास्य या विनोद को मुख्य रूप से अभिव्यक्त किया जाता है। लेकिन यहाँ प्रेम और श्रृंगार प्रधान है, हास्य नहीं। - वियोग रस:
वियोग रस में नायक-नायिका के वियोग या बिछड़ने की भावना होती है। यहाँ ऐसा कोई वर्णन नहीं है। - शांत रस:
शांत रस में वैराग्य या मानसिक शांति की अभिव्यक्ति होती है। इस पंक्ति में ऐसा नहीं है।
अतिरिक्त जानकारी:
रस साहित्य के महत्वपूर्ण अंग हैं। हिंदी में मुख्य नौ रस बताए गए हैं:
- श्रृंगार रस
- वीर रस
- करुण रस
- रौद्र रस
- भयानक रस
- वीभत्स रस
- अद्भुत रस
- शांत रस
- हास्य रस
इस प्रकार, इन पंक्तियों का मुख्य रस संयोग रस है।