Correct option is D
परिचय
यह प्रश्न कौटिल्य के अर्थशास्त्र के प्रथमाधिकरण में दिए गए अध्यायों के सही क्रम को पहचानने से संबंधित है।
व्याख्या
C. वृद्धसंयोग
· वृद्धसंयोगः कौटिल्य के अर्थशास्न के प्रथमाधिकरण का एक महत्वपूर्ण अध्याय है जो राजा के लिए वृद्धों और विद्वानों के साथ संगति के महत्व को बताता है।
· यह अध्याय राजा को अनुभवी, ज्ञानी और वृद्ध व्यक्तियों से परामर्श लेने, उनके अनुभवों से सीखने और उनके मार्गदर्शन में शासन करने की सलाह देता है।
· वृद्धों के साथ संगति से राजा को विवेक, दूरदर्शिता और नीतिगत मामलों में सही निर्णय तेने की क्षमता प्राप्त होती है।
· यह अध्याय दर्शाता है कि प्राचीन भारतीय राजनीति में ज्ञान और अनुभव को कितना महत्व दिया जाता था।
D. राजर्षिवृत्तम्
· राजर्षिवृत्तम् कौटिल्य के अर्थशास्त्र के प्रथमाधिकरण का एक अध्याय है जो एक आदर्श राजा के आचरण और गुणों का वर्णन करता है।
· यह अध्याय राजा को 'राजर्षि' (ऋषि के समान राजा) के गुणों को धारण करने का निर्देश देता है, जिसमें आत्म-नियंत्रण, इन्द्रियों पर विजय, धर्मपरायणता और प्रजा के कल्याण को प्राथमिकता देना शामिल है।
· एक राजर्षि अपनी प्रजा के प्रति पिता के समान व्यवहार करता है और उनके सुख-दुख का ध्यान रखता है।
· यह अवधारणा बताती है कि राजा को केवल शासक नहीं, बल्कि एक नैतिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी होना चाहिए।
A. मन्त्राधिकार
· मन्त्राधिकार-कौटिल्य के अर्थशास्त्र के प्रथमाधिकरण का एक अध्याय है जो मंत्रियों की नियुक्ति, उनके गुणों और राजा द्वारा उनसे परामर्श लेने की प्रक्रिया से संबंधित है।
· यह अध्याय मंत्रियों के चयन के मानदंड, उनकी योग्यताएं और राजा के लिए सही सलाहकारों का चुनाव करने के महत्व पर प्रकाश डालता है।
· राजा को गुप्त मंत्रणा (मंत्रणा की गोपनीयता) बनाए रखने और मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श करने के तरीकों का भी इसमें उल्लेख है।
· यह अध्याय आधुनिक प्रशासन में कैबिनेट और मंत्रिपरिषद की अवधारणाओं से मिलता-जुलता है।
B. राजपुत्ररक्षणम्
· राजपुत्ररक्षणम् कौटिल्य के अर्थशास्त्र के प्रथमाधिकरण का एक अध्याय है जो राजकुमारों की शिक्षा, प्रशिक्षण और उन्हें संभावित खतरों से बचाने के उपायों पर केंद्रित है।
· यह अध्याय राजकुमारों को उचित शिक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और नैतिक मूल्यों के साथ पोषित करने की आवश्यकता पर जोर देता है ताकि वे भविष्य में कुशल शासक बन सकें।
· इसमें राजकुमारों को षड्यंत्रों और बुरे प्रभावों से बचाने के लिए सावधानियां बरतने का भी उल्लेख है।
· यह अध्याय उत्तराधिकार और राजश्शाही की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए राजकुमारों के महत्व को दर्शाता है।
कौटिल्य के अर्थशास्न के प्रथमाधिकरण में अध्यायों का सहीं क्रम है: वृद्धसंयोगः (C), राजर्षिवृत्तम्(D), मन्त्राधिकारः (A), राजपुत्ररक्षणम् (B)।
यह क्रम राजा के व्यक्तिगत विकास (वृद्धसंयोग, राजर्षिवृत्त) से शुरू होकर, शासन के महत्वपूर्ण पहलुओं (मंत्रियों का चयन और परामर्श मन्त्राधिकार) और अंत में भावी पीढ़ी (राजपुत्ररक्षण) की तैयारी तक जाता है।
रोचक तथ्य
अर्थशास्न एक व्यापक ग्रंथ है जो राज्य-प्रशासन, अर्थशास्त्र, सैन्य रणनीति और न्याय प्रणाली सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान करता है, और यह क्रमबद्धता इसके व्यवस्थित दृष्टिकोण को दर्शाती है।