Correct option is A
पंडित व्यंकटमखी ने "चतुर्दंडी प्रकाशिका" नामक ग्रंथ लिखा था, जिसमें भारतीय संगीत के सिद्धांत और रागों का विस्तृत विवरण है। उन्होंने इस ग्रंथ में एक सप्तक में से 72 मेलन रागों को परिभाषित किया था, जो उनके रागों के वर्गीकरण में एक महत्वपूर्ण योगदान है। व्यंकटमखी का यह कार्य कर्नाटिक संगीत के संदर्भ में अत्यधिक महत्वपूर्ण है, और इसने कर्नाटिक संगीत में रागों के निर्माण की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया।
मुख्य बिंदु:
1.
चतुर्दंडी प्रकाशिका: यह एक प्रसिद्ध ग्रंथ है जो पंडित व्यंकटमखी द्वारा लिखा गया है और इसमें संगीत के थाटों और रागों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।
2.
72 मेलन राग: पंडित व्यंकटमखी ने इस ग्रंथ में एक सप्तक (सात तारों) में कुल 72 मेलन रागों का उल्लेख किया, जो कर्नाटिक संगीत के रागों का वर्गीकरण है।
3.
व्यंकटमखी का योगदान: व्यंकटमखी ने कर्नाटिक संगीत के राग वर्गीकरण को सुव्यवस्थित किया और संगीत में माधुर्य की स्थिति को दर्शाया।
4.
ग्रंथ का महत्व: "चतुर्दंडी प्रकाशिका" का संगीत और संगीतकारों पर गहरा प्रभाव पड़ा और इसने भारतीय संगीत के अध्ययन में एक नया मोड़ दिया।
5.
72 मेलन रागों का उपयोग: यह राग वर्गीकरण कर्नाटिक संगीत के अभ्यास और शिक्षण के लिए बहुत प्रभावी था और आज भी इसका महत्व बरकरार है।