Correct option is C
72 मेलकर्ता योजना कर्नाटक संगीत में एक
वर्गीकरण प्रणाली है, जो
72 मूल रागों को दर्शाती है। इस प्रणाली में
12 प्रकार के स्वरस्थनों का प्रयोग होता है। इन 72 रागों को
12 समूहों में विभाजित किया गया है, जिन्हें
चक्र कहा जाता है।
प्रत्येक चक्र में
6 राग होते हैं, और इन रागों में से
दो स्वर (धैवत और निषाद) का भिन्न होना होता है। इसका मतलब यह है कि
प्रत्येक चक्र एक अलग स्वरस्थान का प्रतिनिधित्व करता है, और इसलिए कुल मिलाकर
12 प्रकार के स्वरस्थनों का प्रयोग होता है।
Information Booster:
1.
72 मेलकर्ता योजना में
12 चक्र होते हैं, और प्रत्येक चक्र में
6 राग होते हैं।
2. इन रागों में
सभी स्वरस्थनों का प्रयोग किया जाता है, लेकिन
धैवत और
निषाद स्वर में भिन्नताएँ होती हैं।
3.
स्वरस्थान कर्नाटक संगीत के
स्वरों की संरचना और
रागों के वर्गीकरण को समझने में सहायक होता है।
4. यह प्रणाली संगीतज्ञों को
रागों का संयोजन,
स्वरों के क्रम और
संगीत की गहरी समझ में मदद करती है।
5.
मेलकर्ता योजना का उद्देश्य
रागों के संरचना और उनके प्रयोग को व्यवस्थित करना है।