Correct option is A
नाट्यशास्त्र प्राचीन भारतीय नाट्य, नृत्य और संगीत पर आधारित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसकी रचना महर्षि
भरत मुनि ने की थी। इस ग्रंथ में
कुल 36 अध्याय हैं, जिनमें रंगमंच, अभिनय, नृत्य, संगीत, रस सिद्धांत, वेशभूषा, मंच सज्जा, नाट्य संरचना और भाषा के नियमों को विस्तृत रूप से समझाया गया है। इसे भारतीय नाट्य परंपरा का आधारभूत ग्रंथ माना जाता है। इस ग्रंथ में
रस सिद्धांत को विशेष महत्व दिया गया है, जिसमें
शृंगार, वीर, करुण, रौद्र, हास्य, भयानक, वीभत्स और अद्भुत सहित कुल 8 रसों का वर्णन किया गया है। नाट्यशास्त्र में
चार प्रकार के अभिनय [आंगिक, वाचिक, आहार्य, और सात्त्विक] का भी विस्तार से वर्णन मिलता है।
मुख्य बिंदु:
1. नाट्यशास्त्र को ‘पंचम वेद’ भी कहा जाता है।
2. भरत मुनि को भारतीय रंगमंच का आद्य गुरु (प्रथम आचार्य) माना जाता है।
3. इस ग्रंथ में 108 करनामुद्राओं और 32 प्रकार के नृत्य हाव-भावों का उल्लेख है।
4. यह ग्रंथ संस्कृत नाट्यशैली के विकास का आधार माना जाता है और कालिदास, भास, भवभूति जैसे नाटककारों ने इससे प्रेरणा ली।
5. इसमें ‘नाट्य’, ‘गान’ और ‘नृत्य’ को त्रिविध कलाएँ कहा गया है।
6. यह ग्रंथ विशेष रूप से संस्कृत नाटकों के मंचन से संबंधित नियम और दिशानिर्देश प्रदान करता है।
7. ‘रस’ और ‘भाव’ की अवधारणा को पहली बार व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने का श्रेय नाट्यशास्त्र को ही जाता है।