Correct option is C
सही उत्तर: (C) 29
व्याख्या:
पंडित अहोबल ने अपने सुप्रसिद्ध ग्रंथ 'संगीत पारिजात' (17वीं शताब्दी) में कुल 29 स्वरों का वर्णन किया है। उन्होंने इन स्वरों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है:
- शुद्ध स्वर: 7 (सा, रे, ग, म, प, ध, नि)
- विकृत स्वर: 22
कुल मिलाकर 7 + 22 = 29 स्वर अहोबल द्वारा स्वीकार किए गए हैं। पंडित अहोबल का भारतीय संगीत के इतिहास में एक क्रांतिकारी स्थान है क्योंकि वे पहले संगीतज्ञ थे जिन्होंने वीणा के तार पर स्वरों की स्थापना उनके गणितीय फासले (लंबाई) के आधार पर की थी। उन्होंने वीणा के 36 इंच लंबे तार पर शुद्ध और विकृत स्वरों के निश्चित स्थान बताए, जिससे स्वरों की स्थिति को लेकर वैज्ञानिक स्पष्टता आई।
मुख्य बिंदु:
- ग्रंथ का नाम: संगीत पारिजात।
- स्वर विभाजन: 7 शुद्ध और 22 विकृत।
- अहोबल का योगदान: उन्होंने तार की लंबाई के आधार पर स्वरों के आंदोलन को समझने का प्रयास किया।
- ऐतिहासिक तुलना: जहाँ भरत मुनि ने 22 श्रुतियों की बात की थी, वहीं अहोबल ने श्रुतियों को ही स्वर का रूप देते हुए उनकी संख्या 29 तक पहुँचाई।
- शुद्ध थाट: अहोबल का शुद्ध थाट आधुनिक 'काफी' थाट के समान माना जाता है।