Correct option is B
संगीतशास्त्र के एक प्रमुख ग्रंथ
"संगीत रत्नाकर" की रचना
पंडित शारंगदेव द्वारा की गई थी। इस ग्रंथ में
स्वरों की कुल संख्या 19 बताई गई है, जिसमें
शुद्ध और विकृत स्वर दोनों शामिल हैं। हालाँकि, इसमें
22 श्रुतियों का उल्लेख मिलता है, जो भारतीय संगीत के मूलभूत स्वरसिद्धांत का आधार हैं। श्रुतियाँ स्वरों के सूक्ष्म विभाजन को दर्शाती हैं और यह हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत दोनों में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
मुख्य बिंदु:
1. संगीत रत्नाकर भारतीय संगीत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसकी रचना 13वीं शताब्दी में की गई थी।
2. इस ग्रंथ में संगीत, नृत्य और वाद्ययंत्रों के विस्तृत सिद्धांत दिए गए हैं।
3. यह ग्रंथ हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत परंपराओं के लिए समान रूप से प्रासंगिक है।
4. इसमें स्वरों की कुल संख्या 19 बताई गई है, जिनमें शुद्ध और विकृत स्वर शामिल हैं।
5. इस ग्रंथ में 22 श्रुतियों का उल्लेख किया गया है, जो भारतीय संगीत के मूलभूत तत्व हैं।
6. संगीत रत्नाकर में राग, ताल, नृत्य, वाद्ययंत्र, गायन पद्धति, स्वर विन्यास आदि का विस्तृत विवरण दिया गया है।