Correct option is C
वेंकटमखी ने
‘चतुरदण्डि प्रकाशिका’ नामक ग्रंथ की रचना की थी। यह ग्रंथ
17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लिखा गया और इसमें वेंकटमखी ने गणित का प्रयोग करते हुए यह सिद्ध किया कि
सप्तक (आठ स्वरों का समूह) से
अधिकतम 72 थाटों (मेलों) की रचना की जा सकती है। इस ग्रंथ में उन्होंने
कर्नाटक संगीत के
मेलकर्ता (Melakarta) रागों की संरचना को भी परिभाषित किया और इसे संगीत शास्त्र में एक मील का पत्थर माना जाता है।
चतुरदण्डि प्रकाशिका ने कर्नाटक संगीत के
रागों की व्यवस्था और
संगीत के सिद्धांत को व्यवस्थित किया, जो आज भी कर्नाटक संगीत के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Information Booster:
1.
चतुरदण्डि प्रकाशिका में वेंकटमखी ने
72 मेलों (थाटों) के सिद्धांत की विस्तृत व्याख्या की है।
2. यह ग्रंथ
कर्नाटक संगीत की प्रणाली और
राग निर्माण के बुनियादी तत्वों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
3. वेंकटमखी ने इस ग्रंथ में
मेलकर्ता रागों की संरचना के लिए
गणितीय दृष्टिकोण का उपयोग किया।
4. यह ग्रंथ
संगीत शास्त्र और
संगीतज्ञों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने का कार्य करता है।
5.
चतुरदण्डि प्रकाशिका ने कर्नाटक संगीत में
रागों की श्रेणियाँ और
ध्वनियों की वैज्ञानिक व्याख्या की है।