Correct option is C
दक्षिण भारत के पंडित व्यंकटमुखी ने 17वीं शताब्दी में चतुर्दण्डिप्रकाशिखा नामक एक ग्रन्थ लिखा जिसमें उन्होंने अपने स्वरों का वर्णन किया है। उन्होंने 7 शुद्ध और 5 विकृत स्वर माने है।
कथन a: शारंग देव: शारंगदेव ने अपने ग्रंथ "संगीत रत्नाकर" में विकृत स्वरों की संख्या बारह बताई है।
कथन b: अहोबल: अहोबल ने अपने ग्रंथ "संगीत पारिजात" में विकृत स्वरों की संख्या बाईस बताई है।
कथन c: व्यंकट मखी: वेंकट मखी ने अपने ग्रंथ "चतुर्दंडी प्रकाशिका" में स्वर की व्याख्या की है, लेकिन उन्होंने विकृत स्वरों की संख्या पाँच मानी है।