Correct option is A
वीणा के तारों पर स्वरों को लंबाई के मुताबिक स्थापित करने वाले पहले संगीतज्ञ अहोबल पंडित थे। उन्होंने वीणा के तारों की लंबाई के अलग-अलग हिस्सों से 12 स्वरों के ठीक-ठीक स्थान तय किए थे। इसके बाद, श्रीनिवास पंडित ने अपने ग्रंथ 'राग तत्व विवोध' में भी 12 स्वरों के स्थान बताए थे।
कथन b:
मतंगमुनि ने "बृहद्देशी" नामक ग्रंथ लिखा और "राग" की अवधारणा का वर्णन किया, लेकिन उन्होंने वीणा के तारों पर स्वरों की लम्बाई के अनुसार स्थापना नहीं की।
कथन c:
शारंगदेव ने "संगीत रत्नाकर" लिखा, जिसमें संगीत के व्यावहारिक और सैद्धांतिक पहलुओं का वर्णन है। उन्होंने स्वर और ताल की गहराई से चर्चा की, लेकिन तारों की लम्बाई पर स्वर स्थापना का विवरण नहीं दिया।