Correct option is A
भरतमुनिने अपने संगीत ग्रंथ‘नाट्यशास्त्र’मेंसारणा चतुष्टयी(दो प्रकार की प्रयोगात्मक वीणाओं) के संदर्भ मेंप्रत्येक वीणा में 7–7 तारबाँधने का उल्लेख किया है। उन्होंने संगीत के सिद्धांतों और स्वरों के व्यवहारिक अनुसंधान के लिए दो एकसमान वीणाओं का प्रयोग किया। दोनों वीणाओं की लंबाई, चौड़ाई, तारों की संख्या, लकड़ी की गुणवत्ता, और पर्दों की स्थिति एक समान रखी गई।
इन दोनों वीणाओं कोषड्ज ग्रामिक स्वरोंसे मिलाकर प्रयोग किए गए ताकि नाद (ध्वनि) में समानता रहे और अनुसंधान में त्रुटि न हो। इस प्रयोग का उद्देश्य स्वरों के प्रकार, उनका स्थान, तथा उनमें निहित श्रुतियों की पहचान करना था। इस पद्धति ने भारतीय संगीत केस्वर शास्त्रको वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।
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सारणा चतुष्टयी: दो वीणाओं का प्रयोगात्मक समूह।
प्रत्येक वीणा में7 तारबंधे होते थे।
यह प्रयोगश्रुति निर्धारणऔरस्वर संधिकी जांच हेतु किया गया।
दोनों वीणाओं कोषड्ज ग्रामके अनुसार मिलाया गया था।
भरत का यह प्रयोग नादशास्त्र की प्राचीनतम प्रयोगशाला माना जाता है।
यह प्रयोग भारतीय संगीत केवैज्ञानिक स्वरूपकी नींव माना जाता है।