Correct option is A
परिचय:
यह प्रश्न वाल्मीकि रामायण के अङ्गीरस (प्रधान रस), श्लोक संख्या और प्रथम काण्ड (बालकाण्ड) के सर्गों की संख्या से संबंधित है।
व्याख्या:
सही विकल्प
(a) केवलम् एकम् है, क्योंकि केवल कथन 1 सही है।
·
1. रामायणस्य अङ्गीरसः करुणः अस्ति। (सही)
·
करुण रस रामायण का
अङ्गीरस (प्रधान रस) माना जाता है।
· रामायण का प्रारम्भ ही
शोक (क्रौञ्च पक्षी के वध से उपजा दुख) से हुआ है, जो बाद में
श्लोक के रूप में प्रकट हुआ।
'शोकः श्लोकत्वमागतः' (शोक ही श्लोक बन गया) यह कथन इस बात की पुष्टि करता है। अतः दुःख और वियोग की प्रधानता के कारण इसका मुख्य रस करुण है।
रोचक तथ्य:
·
2. रामायणे पञ्चविंशतिसहस्रश्लोकाः सन्ति । (गलत)
· रामायण में कुल
चतुर्विंशतिसहस्रश्लोकाः (
24,000) श्लोक हैं, न कि
25,000 (पञ्चविंशतिसहस्र)।
· इस कारण इसे
'चतुर्विंशतिसहस्री' भी कहा जाता है।
·
3. रामायणस्य बालकाण्डे पञ्चसप्ततिसर्गाः सन्ति। (गलत)
· रामायण के
बालकाण्ड में कुल
सप्तसप्ततिसर्गाः (
77) सर्ग हैं, न कि
75 (पञ्चसप्तति)।
· (कुछ पाठभेद के अनुसार, यह संख्या थोड़ी भिन्न हो सकती है, लेकिन 75 सर्ग निश्चित रूप से गलत संख्या है)।