Correct option is B
परिचय
स्मृति ग्रन्थ (जैसे याज्ञवल्क्यस्मृति और मनुस्मृति)
धर्म, आचार, व्यवहार (कानून) और
प्रायश्चित्त का विधान करते हैं, जबकि
दर्शन ग्रन्थ (जैसे न्यायदर्शन)
तत्त्वमीमांसा और
ज्ञानमीमांसा का विवेचन करते हैं।
व्याख्या
दिए गए तीन युग्मों में से,
केवल दो युग्म सही हैं: युग्म 2 और युग्म 3।
·
(b) केवलं द्वे युग्मे
सम्यक् (केवल दो युग्म सही हैं)।
सही युग्मों का विवरण:
2.
दण्डनयः : याज्ञवल्क्यस्मृतौ प्रतिपादितः
· यह युग्म
सही है।
·
दण्डनय (राज्य प्रशासन, विधि, और न्याय व्यवस्था) को ही
व्यवहार काण्ड कहा जाता है।
·
याज्ञवल्क्यस्मृति तीन काण्डों (आचार, व्यवहार, प्रायश्चित्त) में विभक्त है, और इसका
व्यवहार काण्ड अत्यन्त प्रसिद्ध है। इसमें राजा के कर्त्तव्य, न्यायालय, प्रमाण, ऋण, विवाद के विषय आदि
दण्डनय से संबंधित विषयों का विस्तृत प्रतिपादन किया गया है।
3.
गृहस्थधर्मः : मनुस्मृतौ विशेषरूपेण निर्दिष्टः
· यह युग्म
सही है।
·
मनुस्मृति में
वर्णाश्रम धर्म का विस्तृत विवेचन है। चारों आश्रमों में से
गृहस्थाश्रम को
आधारभूत और
प्रधान माना गया है।
· मनुस्मृति में
गृहस्थ धर्म से संबंधित नियमों जैसे पंचमहायज्ञ, अतिथि सत्कार, दैनिक आचार आदि का
विशेष रूप से वर्णन किया गया है।
रोचक तथ्य
1.
याज्ञवल्क्यस्मृतिः : न्यायदर्शनम् - यह युग्म
गलत है।
·
याज्ञवल्क्यस्मृति एक
धर्मशास्त्र (स्मृति) ग्रंथ है, जबकि
न्यायदर्शन भारतीय दर्शन के
षड्दर्शन में से एक है। ये दोनों
अलग-अलग विधाओं के ग्रंथ हैं, न कि आपस में संबंधित या एक-दूसरे का भाग।
· न्यायदर्शन के मुख्य आचार्य
गौतम (न्यायसूत्रकार) हैं, जबकि याज्ञवल्क्यस्मृति के प्रणेता
याज्ञवल्क्य ऋषि हैं।
· (a), (c), (d) विकल्प उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर गलत सिद्ध होते हैं।