Correct option is D
परिचय: यह प्रश्न याज्ञवल्क्य स्मृति के
व्यवहाराध्याय (कानूनी प्रक्रिया) और
दायभाग (विरासत) खंडों में वर्णित विशिष्ट संख्यात्मक तथ्यों (पुत्रों के प्रकार, प्रमाण और स्त्रीधन) के सही होने की जाँच करता है।
व्याख्या:
सही विकल्प
(d) न कश्चित् है, क्योंकि दिए गए सभी तीनों कथनों में उल्लिखित संख्यात्मक तथ्य
याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार
असत्य हैं।
रोचक तथ्य:
1. पुत्राणां त्रयोदशप्रकाराणामुल्लेखोऽस्ति । (गलत) ·
यथार्थ संख्या:
याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार,
पुत्रों के
द्वादश (12) प्रकारों का उल्लेख है (अध्याय 2, श्लोक 128-132)।
·
12 पुत्र: इनमें
औरस, कानीन, क्षेत्रज दत्तक इत्यादि शामिल हैं।
मनुस्मृति में भी
12 प्रकार के पुत्रों का वर्णन है।
·
त्रयोदश (13) प्रकार के पुत्रों का उल्लेख याज्ञवल्क्य स्मृति में नहीं है।
2. चतुर्विधं मानुषप्रमाणं वर्णितमस्ति । (गलत) ·
यथार्थ संख्या:
याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार,
मानुष प्रमाण (मनुष्य द्वारा दिए जाने वाले साक्ष्य/सबूत) मुख्य रूप से
त्रिविध (
तीन) प्रकार के वर्णित हैं (अध्याय 2, श्लोक 22):
1.
लिखित (दस्तावेजी सबूत)
2.
भुक्ति (संपत्ति का उपभोग/कब्जा)
3.
साक्षिण (गवाह)
·
अन्य प्रमाण: दिव्य प्रमाण (
दिव्य) पाँच प्रकार के हैं।
3. पञ्चविधं स्त्रीधनं वर्णितमस्ति । (गलत) ·
यथार्थ संख्या:
याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार,
स्त्रीधन (स्त्री का निजी धन) के
षड्विध (
छह) प्रकारों का वर्णन है (अध्याय 2, श्लोक 143):
1.
अध्याग्नि
2.
अध्यवहनिकम्
3.
शुक्लधनम्
4.
प्रीतिदत्तम्
5.
सौदयिकम्
·
निष्कर्ष: चूँकि याज्ञवल्क्य स्मृति में पुत्रों की संख्या 12, मानुष प्रमाणों की संख्या 3 और स्त्रीधन के प्रकार 6 बताए गए हैं, इसलिए दिए गए सभी कथन गलत हैं।