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जायद फसलें: ग्रीष्मकालीन अभियान 2021-22 के लिए कृषि पर राष्ट्रीय सम्मेलन

जायद फसलें: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: देश के विभिन्न हिस्सों में प्रमुख फसल-फसल प्रतिरूप

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जायद फसलें: प्रसंग

  • हाल ही में, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने ग्रीष्मकालीन अभियान 2021-22 के लिए कृषि पर चतुर्थ राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया है जहाँ कृषि मंत्री ने जायद फसलों के उत्पादन पर जोर दिया है।

 

ग्रीष्मकालीन अभियान 2021-22 के लिए कृषि पर राष्ट्रीय सम्मेलन: प्रमुख बिंदु

  • ग्रीष्मकालीन फसलें, या जायद फसलें न केवल अतिरिक्त आय प्रदान करती हैं बल्कि किसानों के लिए रबी एवं खरीफ के मध्य रोजगार के अवसर भी करती हैं जिससे फसल की गहनता में वृद्धि होती है।
  • यद्यपि ग्रीष्म ऋतु में आधे से अधिक कृषित क्षेत्र दलहन, तिलहन एवं पोषक अनाज के अंतर्गत है, सिंचाई के स्रोतों की उपलब्धता वाले कृषक ग्रीष्म ऋतु में चावल एवं सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।
  • चावल सहित जायद फसलों के अंतर्गत क्षेत्र 2017-18 में 71 लाख हेक्टेयर से 2.7 गुना बढ़कर 2020-21 में 80.46 लाख हेक्टेयर हो गया है।

 

ग्रीष्मकालीन अभियान 2021-22 के लिए कृषि पर राष्ट्रीय सम्मेलन: राज्यों को सुझाव

  • ग्रीष्मकालीन फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए राज्यों को बीजों की नई किस्मों का उपयोग करना चाहिए।
  • राज्यों से कहा गया है कि वे अपनी उर्वरक आवश्यकताओं के लिए पहले से योजना निर्मित कर लें एवं केंद्र को आकलन उपलब्ध कराएं ताकि उर्वरक विभाग समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध करा सके।
  • राज्यों को भी एनपीके एवं तरल यूरिया के उपयोग में वृद्धि करनी चाहिए तथा डीएपी उर्वरकों पर निर्भरता कम करनी चाहिए।
  • कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) एवं कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी/आत्मा) को संयुक्त रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण आयोजित करना चाहिए ताकि नवीन तकनीक तथा ज्ञान जमीनी स्तर तक पहुंचे।

 

फसलों का वर्गीकरण

ऋतुओं के आधार पर फसलों को निम्नलिखित वर्गों में वर्गीकृत किया गया है:

  • खरीफ फसलें
  • रबी की फसलें
  • जायद/ग्रीष्मकालीन फसलें

 

जायद फसलों के बारे में

  • मार्च एवं जुलाई के मध्य खरीफ तथा रबी फसलों के बीच अल्पकालिक मौसम में जैद  अथवा ग्रीष्मकालीन फसलें उगाई जाती हैं।
  • ये फसलें अधिकांशतः सिंचित भूमि पर उगाई जाती हैं एवं इसलिए, किसान मानसून की प्रतीक्षा नहीं करते हैं।

 

भारत में ग्रीष्मकालीन फसलें

  • जायद की फसलों को उगाने के लिए कोष्ण मृदा एवं उच्च तापमान (रात्रि में शीतलन) की आवश्यकता होती है।
  • चूंकि वे ग्रीष्म ऋतु में उगाए जाते हैं, अतः उन्हें गर्म शुष्क मौसम एवं पुष्पण (फूल आने) तथा फलने के लिए दिन की लंबी अवधि की आवश्यकता होती है।
  • अधिकांश सब्जियां एवं संकर अनाज जायद के मौसम में उगाए जाते हैं।
  • जायद मौसम की फसलें: धान, मक्का; कद्दू, ककड़ी, टमाटर; बादाम, मूंगफली, काजू; चना, दाल, इत्यादि।

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ग्रीष्मकालीन फसलों के लाभ

  • आय एवं रोजगार: ग्रीष्मकालीन फसलें न केवल अतिरिक्त आय प्रदान करती हैं बल्कि किसानों के लिए रबी एवं खरीफ के मध्य रोजगार के अवसर भी सृजित करती हैं जिससे फसल की गहनता बढ़ जाती है।
  • मृदा के स्वास्थ्य में सुधार: ग्रीष्म ऋतु की फसलों की खेती से मृदा के स्वास्थ्य में सुधार होता है एवं मशीनीकृत बुवाई से भी ग्रीष्म ऋतु की फसलों को बेहतर वृद्धि करने में सहायता मिलती है।
  • खराब मौसम के प्रति बीमा: ग्रीष्म ऋतु की फसलें रबी के मौसम में भारी वर्षा के कारण होने वाली हानि को कम करने में सहायक सिद्ध होती हैं।

 

 

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