तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर नियंत्रण_00.1
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तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर नियंत्रण

प्रसंग

  • हाल ही में, तालिबान ने लगभग दो दशकों में अफगान सुरक्षा बलों के विकास के लिए अमेरिका एवं नाटो द्वारा अरबों डॉलर व्यय किए जाने के बावजूद,मात्र एक सप्ताह में लगभग संपूर्ण अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया।
  • तालिबान उग्रवादियों ने 15 अगस्त को काबुल में प्रवेश किया एवं केंद्र सरकार के बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की। अफगान राष्ट्रपति पहले ही देश छोड़ चुके हैं।
  • तालिबान के एक अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति भवन सहित अफगान राज्य की 90% से अधिक इमारतें तालिबान के नियंत्रण में हैं।

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर नियंत्रण_50.1

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तालिबान के बारे में

  • यह स्वयं को अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के रूप में संदर्भित करता है। यह अफगानिस्तान में एक देवबंदी इस्लामी आंदोलन तथा सैन्य संगठन है, जो वर्तमान में देश के भीतर युद्धरत है।
    • 2016 से तालिबान का नेता मौलवी हैबतुल्ला अखुंदजादा रहा है।
  • तालिबान (पश्तो भाषा में “छात्र”) 1990 के दशक के आरंभ में अफगानिस्तान से सोवियत सैनिकों की वापसी के पश्चात उत्तरी पाकिस्तान में उभरा
  • उन्होंने 1995 से अफगान क्षेत्रों पर कब्जा करना आरंभ कर दिया एवं 1998 तक, उन्होंने अफगानिस्तान के लगभग 90% हिस्से पर कब्जा कर लिया था।
  • मान्यता: शरिया कानून की कठोर व्याख्या में विश्वास करता है- जैसे कि दोषी हत्यारों एवं व्यभिचारियों की सार्वजनिक फांसी,  तथा चोरी के दोषी पाए जाने वालों के लिए अंग-विच्छेदन।
  • अत्यंत रूढ़िवादी और पितृसत्तात्मक:
    • पुरुषों को दाढ़ी बढ़ानी पड़ती थी एवं महिलाओं को पूर्ण रूप से आवरित (ढका हुआ) बुर्का पहनना पड़ता था।
    • उन्होंने टेलीविजन, संगीत एवं सिनेमा पर प्रतिबंध लगा दिया और 10 वर्ष और उससे अधिक उम्र की लड़कियों को  विद्यालय जाने से प्रतिबंधित कर दिया।
    • मानवाधिकारों के उल्लंघन एवं सांस्कृतिक दुर्व्यवहार का आरोप: उदाहरण के लिए, अंतरराष्ट्रीय आक्रोश के बावजूद, 2001 में मध्य अफगानिस्तान में प्रसिद्ध बामियान बुद्ध की मूर्तियों को नष्ट करना

वाहन उच्छिष्‍टन नीति

हाल के घटनाक्रम के बारे में मुख्य बिंदु

  • पृष्ठभूमि: यह अमेरिका का सर्वाधिक लंबा युद्ध था जो 11 सितंबर, 2001 के अलकायदा के ओसामा बिन लादेन द्वारा किए गए आतंकी हमलों पश्चात आरंभ हुआ था, जिसे तब तालिबान सरकार द्वारा संरक्षण प्रदान किया गया था।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका तथा उसके नाटो सहयोगी 20 से अधिक वर्षों तक आतंकवादी तालिबान के विरोध युद्धरत रहे एवं लोकतंत्र के सिद्धांत के आधार पर एक निर्वाचित सरकार स्थापित करने का प्रयास किया।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका एवं तालिबान के  मध्य दोहा शांति समझौता 2020: अफगानिस्तान से अमेरिकी एवं  सहयोगी सैन्य बलों की वापसी के परिणामस्वरूप अफगानिस्तान की वर्तमान सरकार कमजोर  एवं असुरक्षित हो गई।
    • यही कारण है कि तालिबान सैन्य बलों की तीव्र गति से प्रगति हुई एवं एक सप्ताह के भीतर अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर नियंत्रण कर लिया गया।
  • देशों द्वारा उठाए गए कदम: तालिबान सैन्य बलों की धीमी प्रगति एवं अफगानिस्तान में सत्ता पर आसन्न नियंत्रण के कारण अफगानिस्तान में  निवास करने वाले विभिन्न लोकतांत्रिक देशों के लोगों के उत्पीड़न का भय उत्पन्न हो गया। इससे संयुक्त राज्य अमेरिका एवं भारत सहित अनेक देशों द्वारा अपने नागरिकों को वहां से वापस निकाला गया है।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रयास: दूतावास के कर्मचारियों एवं अमेरिकी सैन्य बलों के लिए कार्य करने वाले हजारों अफगानों को सुरक्षित निकालने में सहायता करने हेतु अतिरिक्त 1,000 अमेरिकी सैनिकों की तैनाती का आदेश दिया।
    • भारत: भारत ने काबुल से एयर इंडिया की उड़ान के माध्यम से 129 यात्रियों को निकाला। अन्य उड़ानें भी दूसरों को भारत वापस लाने के लिए निर्धारित हैं।
    • अन्य राष्ट्र भी अपने दूतावास बंद कर रहे हैं एवं अपने नागरिकों को निकालने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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