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Protests in Cuba and the Cuban Crisis (Hindi)

क्यूबा संकट

 

प्रासंगिकता

  •         जीएस 1: विश्व के इतिहास में 18वीं शताब्दी की घटनाएं सम्मिलित होंगी।
  • जीएस 2: भारत के हितों, भारतीय प्रवासी समूहों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।

 

संदर्भ

  • क्यूबा में लोग वर्तमान आर्थिक स्थिति एवं कोविड-19 महामारी से उचित प्रकार से निपटने में सरकार की विफलता के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

मुख्य बिंदु

 

  •         क्यूबा के बारे में

o   क्यूबा विगत छह दशकों से तानाशाही साम्यवादी शासन के अंतर्गत एक लैटिन अमेरिकी देश है।

o   यह मुख्य रूप से एक स्पेनिश भाषी आबादी है एवं इसका सकल घरेलू उत्पाद लगभग 100 बिलियन डॉलर है।

o   इस देश की अधिकांश जनसंख्या ईसाई धर्म का अनुसरण करती है।

 

  •         विरोध प्रदर्शन के बारे में

o   विरोध आर्थिक संकट के कारण आरंभ हुआ, जो सोवियत संघ के पतन के पश्चात से सर्वाधिक खराब है।

o   देश में अन्न के अभाव, कोविड-19 के बढ़ते मामलों और भीषण बिजली कटौती के कारण लोग सड़कों पर उतर आए।

o   ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के साथ इन घरेलू मुद्दों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

  • देशव्यापी तालाबंदी के पश्चात कोविड-19 ने पर्यटन क्षेत्र पर निर्भर लोगों- विशेषकर टैक्सी चालकों और व्यापारियों पर दबाव डाला है ।

 

  •         सरकार द्वारा उठाए गए कदम

o   सरकार ने निजी व्यवसायों को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के अधिकांश क्षेत्रों में संचालित करने की अनुमति दी, जो एक साम्यवादी देश का एक असामान्य उपाय  है।

o   प्राधिकृत उद्योगों में अचानक वृद्धि देखी गई है और उनमें से अधिकांश निजी स्वामित्व में संचालित हैं।

o   सरकार ने अमेरिका स्थित समर्थकों पर विरोध प्रदर्शनों को बल देने का आरोप लगाया है।

https://www.nytimes.com/2021/07/11/world/americas/cuba-crisis-protests.html

वैश्विक प्रतिक्रिया

  •         अमेरिकी राष्ट्रपति, जो बिडेन, क्यूबा के लोगों के समर्थन में सामने आए और ‘स्वतंत्रता’ के उनके आह्वान का समर्थन किया।
  •         कनाडा के प्रधानमंत्री, जस्टिन ट्रूडो ने, यद्यपि, हल्की प्रतिक्रिया दी और चल रहे विरोध प्रदर्शन के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया।
  •         जबकि रूस ने विरोध प्रदर्शनों पर बाह्य हस्तक्षेप के विरुद्ध चेतावनी दी थी।

https://indianexpress.com/article/explained/explained-cuba-anti-government-protests-7400964/

महत्व

  •         विरोध प्रदर्शनों की सदाशयता और उसके बाद की अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया ने द्वीपीय देश को सुर्खियों में ला दिया है।
  •         अमेरिका और रूस की विरोधाभासी प्रतिक्रियाओं ने 1962 के क्यूबा संकट की याद दिला दी है, जो शीत युद्ध का केंद्र था।

 

क्यूबा मिसाइल संकट

  •         बे ऑफ पिग्स आक्रमण के विफल होने के पश्चात, जिसका उद्देश्य क्यूबा में फिदेल कास्त्रो की सरकार को उखाड़ फेंकना था, कास्त्रो ने भविष्य में किसी भी अमेरिकी आक्रमण केविरुद्ध सोवियत संघ से सहायता मांगी थी।
  •         सोवियत संघ के राष्ट्रपति ख्रुश्चेव ने देश में परमाणु हथियार स्थापित किए थे, जो अमेरिका की ओर निर्देशित थे।
  •         ख्रुश्चेव ने तर्क दिया कि यह क्यूबा की सुरक्षा के लिए था, जबकि गुप्त उद्देश्य सोवियत संघ के पक्ष में वैश्विक शक्ति को पलट देना था।
  •         अमेरिका को इन घटनाक्रमों के बारे में ज्ञात होने के पश्चात, उसके राष्ट्रपति जे.एफ. कैनेडी ने क्यूबा तक अधिक मिसाइलों को पहुंचने से रोकने के लिए एक नौसैनिक नाकाबंदी की स्थापना की और सोवियत संघ से पहले से स्थापित मिसाइलों को हटाने के लिए कहा।
  •         इस पूरे प्रकरण को क्यूबा मिसाइल संकट के रूप में जाना जाता है।

https://www.britannica.com/event/Cuban-missile-crisis

यह कैसे समाप्त हुआ?

संकट अमेरिका और रूस के मध्य एक शांति समझौते के साथ समाप्त हुआ, जिसमें दोनों देश तनाव कम करने पर सहमत हुए। यद्यपि, शीत युद्ध  समाप्त होने से बहुत दूर था। इस संकट ने दोनों देशों के हथियारों के निर्माण को और प्रवर्धित कर दिया, जो  केवल सोवियत संघ के विघटन के पश्चात ही समाप्त हुआ।

https://www.youtube.com/channel/UCtKv7_z4rh37OCSEfkZuGow

 

 

 

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