Prelims Specific Articles- 3 August 2021 (Hindi)_00.1
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Prelims Specific Articles- 3 August 2021 (Hindi)

अखिल भारतीय नियतांश (कोटा) योजना

Prelims Specific Articles- 3 August 2021 (Hindi)_50.1

http://bit.ly/2MNvT1m

 

प्रसंग

  • हाल ही में, केंद्र सरकार ने वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा / दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए अखिल भारतीय नियतांश (एआईक्यू) योजना में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) हेतु 27% आरक्षण  तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10% आरक्षण की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु

  • एआईक्यू के बारे में: 1986 में सर्वोच्च न्यायालय (एस सी ) के निर्देशों के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया था।
  • उद्देश्य: किसी भी राज्य के छात्रों को अन्य राज्य में स्थित चिकित्सा महाविद्यालयों में अध्ययन की इच्छा रखने वाले छात्रों को निवास-मुक्त योग्यता-आधारित अवसर प्रदान करना।
  • संरचना: सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातक (यूजी) सीटों का 15% और  परास्नातक (पीजी) सीटों का 50% समाविष्ट है।
  • एआईक्यू के अंतर्गत आरक्षण का विकासक्रम:
    • 2007 तक, एआईक्यू के अंतर्गत कोई आरक्षण-आधारित प्रवेश नहीं।
    • अभय नाथ बनाम दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य निर्णय, 2007: सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि अनुसूचित जातियों के लिए 15% और अनुसूचित जनजातियों के लिए 5% आरक्षण एआईक्यू में प्रारंभ किया जाए।
    • अब इस निर्णय से एक्यूआई में ओबीसी (27%) और ईडब्ल्यूएस (10%) के लिए भी आरक्षण प्रदान किया जाएगा।
    • इस निर्णय से सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में आवेदन करने वाले हजारों मेडिकल छात्रों के लाभान्वित होने की संभावना है।
  • केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम, 2007 (ओबीसी के लिए 27% आरक्षण का प्रावधान किया) और संविधान (एक सौ और तीसरा संशोधन) अधिनियम, 2019 (ईडब्ल्यूएस के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान किया) राज्य की चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालय के एक्यूआई सीटों पर लागू नहीं थे।

 

 

ई-रूपी प्रणाली

 

प्रसंग

  • हाल ही में, केंद्र सरकार ने लाभार्थियों के मोबाइल फोन पर सीधे सरकार के मौद्रिक लाभ भेजने हेतु एक नवीन डिजिटल भुगतान प्रणालीई- रूपी का प्रारंभ किया है।
  • भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा अपने यूपीआई प्लेटफॉर्म पर और वित्तीय सेवा विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरणतथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से विकसित ।

मुख्य बिंदु

  • ई-रूपी के बारे में: यह एक नकद रहित एवं संपर्क रहित डिजिटल भुगतान माध्यम है, जिसे एसएमएस-श्रृंखला अथवा क्यूआर कोड के रूप में लाभार्थियों के मोबाइल फोन पर पहुंचाया जाएगा।
    • यह सेवाओं के प्रायोजकों को बिना किसी भौतिक अंतरापृष्ठ के डिजिटल तरीके से लाभार्थियों एवं सेवा प्रदाताओं से संबंध स्थापित करेगा।
  • एक डिजिटल उपहार-वाउचर के रूप में कार्य करेगा: इसका लाभार्थियों द्वारा मोचन किया जा सकता है जब वे किसी विशिष्ट सरकारी सेवाओं का उपयोग करते हैं।
    • वाउचर के मोचन हेतु डिजिटल प्रणाली को कार्ड, ऐप या इंटरनेट अधिगम की आवश्यकता नहीं होती है।
    • सरकार द्वारा डिजिटल टोकन, संबंधित नागरिकों को एसएमएस श्रृंखला अथवा क्यूआर कोड के माध्यम से एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने हेतु भेजे जाएंगे।
  • जारीकर्ता संस्था: यह बैंकों में शामिल हो गया है जो जारीकर्ता संस्थाएं होंगी।
    • किसी भी व्यावसायिक अथवा सरकारी एजेंसी को विशिष्ट व्यक्तियों के ब्योरे और भुगतान करने के उद्देश्य के साथ साझेदार बैंकों से संपर्क करना होगा, जो निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाता दोनों हैं।
  • लाभार्थी का अभिनिर्धारण: उनके मोबाइल नंबर का उपयोग करके अभिनिर्धारित किया जाएगा एवं बैंक द्वारा सेवा प्रदाता को किसी दिए गए व्यक्ति के नाम पर आवंटित वाउचर केवल उस व्यक्ति को प्रदान किया जाएगा।
  • उपयोग: यह प्रणाली क्षरण रहित होनी चाहिए एवं नागरिकों को गैर-हस्तांतरणीय सेवा प्रदान करती है।
    • विभिन्न सरकारी सेवाएं प्रदान करने में: मातृ एवं शिशु कल्याण योजनाओं, टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों, दवाओं और निदान के तहत दवाएं और पोषण संबंधी सहायता प्रदान करने के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, उर्वरक सहायिकी आदि जैसी योजनाओं के तहत सेवाएं प्रदान करने हेतु प्रयोग किया जा सकता है।
    • निजी क्षेत्र: अपने कर्मचारी कल्याण और व्यावसायिक सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में इन डिजिटल वाउचर का लाभ उठा सकते हैं।

 

 

 

बायोटेक-प्राइड

 

प्रसंग

  • हाल ही में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा बायोटेक-प्राइड (डेटा विनिमय के माध्यम से अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन देना) दिशानिर्देश जारी किए गए थे।

 

 

मुख्य बिंदु

  • दिशा-निर्देशों का उद्देश्य देश भर में विभिन्न शोध समूहों में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना है।
  • इसका उद्देश्य भारतीय शोध एवं समाधान के लिए देश का अपना विशिष्ट डेटाबेस निर्मित करना है।
  • भारतीय नागरिकों के लाभ के लिए युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा डेटा के विनिमय एवं अंगीकृत करने हेतु स्वदेशी डेटाबेस में एक वृहद समर्थकारी तंत्र होगा।
  • व्यापक पैमाने पर डेटा की एक विस्तृत श्रृंखला साझा करने से आणविक और जैविक प्रक्रियाओं की समझ को उन्नत करेगा।
  • यह कृषि, पशुपालन, मौलिक अनुसंधान पर मानव स्वास्थ्य में योगदान देगा और इस प्रकार सामाजिक लाभों तक विस्तृत होगा।
  • इन दिशानिर्देशों को जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित क्षेत्रीय जैव प्रौद्योगिकी केंद्र में भारतीय जैविक डेटा केंद्र (आईबीडीसी) के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा।
  • बायो-ग्रिड:
    • अन्य वर्तमान डेटा समुच्चयों / डेटा केंद्रों को इस आईबीडीसी से जोड़ा जाएगा जिसे बायो-ग्रिड कहा जाएगा।
    • यह जैविक ज्ञान, सूचना एवं डेटा हेतु एक राष्ट्रीय कोष होगा और इसके विनिमय को सक्षम करने, डेटा समुच्चयों के लिए सुरक्षा, मानकों तथा गुणवत्ता के लिए उपायों को विकसित करने और डेटा तक अधिगम के लिए विस्तृत रूपरेखा स्थापित करने के लिए उत्तरदायी होगा।
  • ये दिशा निर्देश वास्तव में जैविक डेटा के उत्पादन से संबंधित नहीं हैं बल्कि देश की वर्तमान विधियों, नियमों, विनियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार उत्पन्न सूचना एवं ज्ञान को साझा करने  तथा विनिमय के लिए एक समर्थकारी तंत्र है।

 

 

 

डिजिटल भुगतान सूचकांक

 

प्रसंग

  • आरबीआई ने देश में भुगतान के डिजिटलीकरण की सीमा का आकलन करने के लिए आधार अवधि के रूप में मार्च 2018 के साथ डिजिटल भुगतान सूचकांक जारी किया है।

 

मुख्य बिंदु

  • आरबीआई-डीपीआई सूचकांक ने हाल के वर्षों में देश भर में डिजिटल भुगतानों को तीव्र गति से अपनाने और सघनीकरण का प्रतिनिधित्व करने वाले सूचकांक में उल्लेखनीय वृद्धि का प्रकटन किया है।
  • इसे 1 जनवरी 2021 को विमोचित किया गया था।
  • मार्च 2021 में डीपीआई मार्च 2020 के 84 की तुलना में बढ़कर 270.59 हो गया, जो देश में कोविड-प्रभावित वर्ष के दौरान डिजिटल संव्यवहार में पुष्ट वृद्धि का संकेत देता है।
  • इस सूचकांक में पांच व्यापक मानदंड शामिल हैं जो देश में विभिन्न समय अवधियों में डिजिटल भुगतान के सघनीकरण तथा अंतः प्रवेशन को मापने में सक्षम बनाते हैं।
मापदण्ड  भारांश
भुगतान सक्षमकर्ता 25%
भुगतान अवसंरचना – मांग पक्ष कारक 10%
भुगतान अवसंरचना – आपूर्ति पक्ष कारक 15%
भुगतान निष्पादन 45%
उपभोक्ता केन्द्रीयता 5%

 

  • डिजिटल भुगतान सूचकांक भी सरकार के लिए देश की वित्त रहित अर्थव्यवस्था के विकास की गणना की एक युक्ति है।
  • आरबीआई-डीपीआई मार्च 2021 से अर्धवार्षिक आधार पर आरबीआई की वेबसाइट पर चार माह के अंतराल पर प्रकाशित किया जाएगा।

 

 

 

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