जनसंख्या तथा आर्थिक विकास_00.1
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जनसंख्या तथा आर्थिक विकास

जनसंख्या तथा आर्थिक विकास

जनसंख्या तथा आर्थिक विकास_50.1

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आर्थिक वृद्धि एवं आर्थिक विकास एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था के बहुत महत्वपूर्ण संकेतक हैं।

जबकि आर्थिक वृद्धि एक मात्रात्मक अवधारणा है तथा इसे एक समय अवधि के दौरान अर्थव्यवस्था में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मान में वृद्धि के रूप में संदर्भित किया जा सकता है, जीडीपी और जीएनपी में परिवर्तन के संदर्भ में मापा जाता है, आर्थिक विकास एक गुणात्मक अवधारणा है उस प्रक्रिया को संदर्भित करता है जिसके द्वारा किसी राष्ट्र की सामान्य जनसंख्या के समग्र स्वास्थ्य, कल्याण और शैक्षणिक स्तर में सुधार होता है। आर्थिक विकास को मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) द्वारा मापा जाता है।

 

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आर्थिक वृद्धि के कारक

अनेक कारक, जिनकी मात्रा में सुधार या वृद्धि से अर्थव्यवस्था उच्च विकास  की ओर अग्रसर हो सकती है।

  1. प्राकृतिक संसाधन: एक अर्थव्यवस्था के लिए कठिन किंतु असंभव नहीं, अधिक प्राकृतिक संसाधनों की खोज, एक अर्थव्यवस्था के साथ उपलब्ध दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों का सुधार और विवेकपूर्ण उपयोग इसकी वृद्धि को सुगम बनाता है।
  2. भौतिक पूंजी अथवा आधारिक अवसंरचना: भौतिक पूंजी जैसे सड़कों, स्वचालित मशीनरी, कारखानों, वाहनों में निवेश, मानवीय गतिविधियों के लिए मानव पूंजी की तुलना में अधिक कुशल है। यह समय, ऊर्जा की बचत करता है एवं अर्थव्यवस्था की समग्र उत्पादकता में सुधार करता है।
  3. जनसंख्या अथवा श्रम: श्रम, उत्पादन का एकमात्र सक्रिय कारक होने के नाते, एक अर्थव्यवस्था के वांछित उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए उत्पादन के अन्यसमस्त कारकों को एकत्रित कर, जनसंख्या की मात्रा, संरचना, वितरण एवं गति आर्थिक विकास की दर में सहायता या बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।
  4. मानव पूंजी: शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम सेउनके कौशल और क्षमताओं में सुधार के लिए मानव पूंजी में निवेश में वृद्धि से उनकी गुणवत्ता  एवं उत्पादकता में सुधार होगा जिससे आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा।
  5. प्रौद्योगिकी: उन्नत तकनीक श्रम के समान स्तरों के साथ उत्पादकता में सुधार करती है, जिससे अर्थव्यवस्था के लिए लागत कम हो जाती है।
  6. विधान: स्पष्ट रूप से निर्मित किए गएविधान अर्थव्यवस्था के निर्बाध कार्य संचालन में सहायता करते हैं।

 

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जनसंख्या में वृद्धि – अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा या बुरा?

जनसंख्या किसी अर्थव्यवस्था की वृद्धि को निर्धारित करने वाला  सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है, जनसंख्या का अत्यधिक होना या अत्यंत कम होना इस पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

ऐसा कहा जाता है कि एक वृद्धिशील जनसंख्या वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक बड़ा बाजार, बड़ा कार्यबल, जनांकिकीय लाभांश के लाभ, अधिक नवाचार, कुल उत्पादन में वृद्धि और बहुत कुछ प्रदान करके आर्थिक विकास में  सहायता करती है।

यद्यपि, यह दृष्टिकोण त्रुटिपूर्ण है। तीव्र गति से वृद्धि करती हुई जनसंख्या आर्थिक विकास में बाधक है।

जनसंख्या में तीव्र वृद्धि का प्रतिकूल प्रभाव

  1. प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव- अति जनसंख्या देश के प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग, दोहनतथा अवक्रमण करती है, विशेष रूप से भारत जैसी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में जहां कृषि बहुसंख्यक आबादी के लिए आजीविका का मुख्य स्रोत है। भूमि उत्पादन का एक सीमित कारक है। भूमि का विखंडन इसे आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के अयोग्य बना देता है जिससे उत्पादकता कम हो जाती है।
  2. प्रति व्यक्ति आय में कमी
  3. अपर्याप्त पूंजी निर्माण: व्यक्तियों की प्रति व्यक्ति आय मेंकमी के कारण, अधिकांश आय उपभोग के वस्तुओं परव्यय किया जाता है। बचत नगण्य है, इसलिए पूंजीगत वस्तुओं या पूंजी निर्माण में निवेश के लिए बहुत कुछ नहीं बचा है।
  4. बेरोजगारी और अल्प-रोजगारः जनसंख्या में वृद्धि के साथ रोजगार के अवसर प्राप्त नहीं होने के कारण बेरोजगारी, प्रच्छन्न बेरोजगारी सामान्य हो जाती है।
  5. पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव: अति जनसंख्या का सर्वाधिक गंभीर एक प्रभाव जोहै, कि वृद्धिशीलजनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति, शहरीकरण, अपशिष्ट उत्पादन, अपर्याप्त अपशिष्ट निपटान, वनोन्मूलन, रेत खनन, घटते जल स्तर ने, पर्यावरण को अवक्रमित किया है, जलवायु परिवर्तन सर्वाधिक बुरा प्रभाव है।
  6. संघर्ष एवं अपराध: सीमित संसाधनों के लिए अत्यधिक व्यक्तियों में प्रतिस्पर्धा से विवेक रह जाता है। अपराध, शराब, मादक द्रव्यों का दुरुपयोग दिनचर्या बन गया है।
  7. अपर्याप्त जीवन स्तर: जनसंख्या में वृद्धि के साथ रोजगार का मार्ग नहीं होने से व्यक्तियों का का जीवन स्तरनिम्न कोटि का है।
  8. नित्य वैश्विक महामारी और जानपदिक रोग: अल्प आय एवं बचत के कारण स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश नगण्य है। निर्धनता, अपर्याप्त स्वच्छता और भीड़ भाड़ के कारण महामारी और जानपदिक रोगों का प्रकोप निरंतर होता है। उदाहरण के लिए, हाल ही में विश्व की सर्वाधिकजनसंख्या वाले देश चीन के वुहान में एक महामारी कोविड -19 का प्रकोप, इसकीविशाल जनसंख्या और मुक्त अर्थव्यवस्था के कारण कुछ ही समय में एक वैश्विक महामारी बन गया।
  9. कुपोषण, अकाल, बाढ़ तथा सूखे

 

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जनसंख्या नियंत्रण

जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि की समस्या जो निर्धनता का मुख्य परिणाम है,  पुत्र प्राप्ति की एक आकांक्षा, मृत्यु दर में कमी, जन्म दर में वृद्धि, चिकित्सा और तकनीकी प्रगति, परिवार नियोजन पर जागरूकता का अभाव के समाधान की आवश्यकता है।

लोगो को शिक्षित करना, बालिकाओं के लिए शैक्षिक अवसर प्रदान करना, परिवार नियोजन के बारे में लोगों को जागरूक करना, कर लाभ और रियायतें जैसे प्रोत्साहन प्रदान करना, यौन शिक्षा, अति जनसंख्या  के सामाजिक विपणन आंकड़ों का दृश्य निरूपण एक इष्टतम स्तर प्राप्त नहीं करने पर नियंत्रित करने में एक लंबा मार्ग तय कर सकता है।

इसलिए, जनसंख्या में  यह तीव्र वृद्धि न कि केवल क्रमिक वृद्धि ही समस्या है।  अति जनसंख्या आर्थिक विकास को अवरुद्ध करती है। तीव्र गति से  वृद्धिशील जनसंख्या में आर्थिक विकास के प्रयास ” रेत पर लिखावट की भांति जनसंख्या वृद्धि  की  लहरों के द्वारा बहा ले जाती हैं जो सब हमने लिखा हो”।

 

 

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