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Ministry of Cooperation (Hindi)

सहकारिता मंत्रालय

 

प्रासंगिकता

  •         जीएस पेपर 2: भारतीय संविधान – सरकार के कार्यकारी और न्यायपालिका, मंत्रालयों और विभागों की संरचना, संगठन एवं कार्य ।

प्रसंग

हाल ही में, ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने के लिए भारत सरकार द्वारा एक पृथक सहकारिता मंत्रालय  का निर्माण किया गया था।

o   इस तरह के कदम की घोषणा केंद्रीय बजट 2021 में की गई थी जिसमें सहकारी समितियों के लिए एक अलग प्रशासनिक ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव था।

सहकारी समितियों के बारे में:

  •         परिभाषा: अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) सहकारी समितियों को संयुक्त रूप से स्वामित्व वाले और लोकतांत्रिक रूप से नियंत्रित उद्यम के माध्यम से अपनी सामान्य आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए स्वेच्छा से एकत्रित व्यक्तियों के एक स्वायत्त संघ के रूप में परिभाषित करता है।

o   संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2012 को सहकारिता का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया था।

  •         सहकारी समितियों की श्रेणियाँ: सहकारी समितियां अनेक प्रकार की होती हैं,  किंतु मोटे तौर पर दो प्रकारों में वर्गीकृत की जा सकती हैं, विशेषकर कृषि क्षेत्र में।
  1.       उत्पादक सहकारी समितियां: कृषकों,  मत्स्य पालकों, कारीगरों  अथवा श्रमिकों द्वारा आपूर्ति की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के लिए उच्चतम संभव मूल्य प्राप्त करना चाहती हैं।
  2.       उपभोक्ता सहकारी समितियां: अपने सदस्यों को सर्वाधिक आर्थिक दरों पर आगत (उर्वरक, बीज, ऋण, आदि), किराने का सामान, आवास, स्वास्थ्य और अन्य सेवाएं प्रदान करती हैं।

 

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भारत में सहकारी समितियों से संबंधित विधिक प्रावधान

  •         यह संविधान की अनुसूची 7 के अंतर्गत राज्य सूची की प्रविष्टि 32 के तहत राज्य का विषय है।

o   एक ही राज्य में उपस्थिति रखने वाली सहकारी समितियां अपने संबंधित राज्यों में विधियों द्वारा शासित होती हैं, जिसमें एक सहकारिता आयुक्त और  सहकारी समितियों का निबंधक उनके शासी कार्यालय के रूप में होते हैं।

  •         बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002: संसद द्वारा एक से अधिक राज्यों में संचालन करने वाली समितियों को शासित करने के लिए अधिनियमित किया गया।

o   सहकारी समितियों के केंद्रीय निबंधक उनके नियंत्रण प्राधिकार हैं किंतु स्थानीय स्तर पर राज्य निबंधक उनकी ओर से कार्यवाही करता है।

  •         राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) का गठन: भारत में सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है। इसके मुख्य कार्यों में शामिल हैं-

o   राष्ट्रीय स्तर पर सहकारी विकास कार्यक्रमों की योजना बनाना, उन्हें प्रोत्साहन देना, समन्वय करना और वित्तपोषण करना।

o   यह  कृषकों और अन्य कमजोर वर्गों के सहकारी संस्थानों को वित्तीय, बीमा और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराता है।

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सहकारी समितियों के संदर्भ में संविधान के प्रावधान

  •         संविधान (97वां संशोधन) अधिनियम, 2011 ने भारत में कार्यरत सहकारी समितियों के संबंध में भाग IX ए (नगरपालिका) के ठीक  उपरांत एक नया “भाग IX बी” समाविष्ट किया।

संविधान के भाग III के  अंतर्गत अनुच्छेद 19(1) (सी): “सहकारिता”  का प्रावधान करता है,  जो  समस्त नागरिकों को मौलिक अधिकार का दर्जा प्रदान कर सहकारी समितियों  के निर्माण की अनुमति प्रदान करता है।

  •         “सहकारी समितियों के प्रोत्साहन” के संबंध में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (भाग IV) में अनुच्छेद 43 बी समाविष्ट किया गया था।

 

 

नवगठित सहकारिता मंत्रालय के मुख्य उद्देश्य

  •         देश में सहकारिता आंदोलन को सशक्त बनाने के लिए एक  पृथक प्रशासनिक, विधिक एवं नीतिगत ढांचा प्रदान करना।
  •         सहकारिता आंदोलन को जमीनी स्तर तक पहुँचाने में सहायता करके एक  वास्तविक जन-आधारित आंदोलन बनाना।
  •         सहकारी समितियों के लिए व्यापारिक सुगमता हेतु प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और बहु-राज्य सहकारी समितियों (एमएससीएस) के विकास को सक्षम बनाना।

 

एक समर्पित सहकारिता मंत्रालय के लाभ

  •         सहकारी समितियों के अधिगम में वृद्धि में सहायता: वर्तमान में, सहकारी संरचना मात्र कुछ मुट्ठी भर राज्यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक आदि में फलने-फूलने और अपनी छाप छोड़ने में सफल रही है।

o    नवनिर्मित मंत्रालय के अंतर्गत, सहकारी आंदोलन को अन्य राज्यों में भी प्रवेश करने के लिए आवश्यक आवश्यक वित्तीय और विधिक शक्ति प्राप्त होगी।

  •         सहकारी वित्त पोषण संरचना को सुदृढ़ बनाना: सहकारी संस्थाओं को केंद्र से या तो इक्विटी के रूप में या कार्यशील पूंजी के रूप में पूंजी प्राप्त होती है,, जिसके लिए राज्य सरकारें प्रतिभूति प्रदान करती हैं।

o   हे   नवनिर्मित मंत्रालय के अंतर्गत, सहकारी वित्त पोषण संरचना को सकेगा जीवन का एक नया पट्टा प्राप्त हो सकेगा।

  •         समर्पित मंत्रालय वर्तमान प्रशासनिक विसंगति को दूर करेगा: पहले सहकारी समितियां कृषि मंत्रालय के अधीन थीं जो सहकारी समितियों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए निर्मित नहीं की गई थी। इसके परिणामस्वरूप भारत में सहकारी समितियों का अपर्याप्त ध्यान और विकास हुआ।

o   पृथक मंत्रालय विकसित सहकारी समितियों की आवश्यकताओं को प्रभावी रूप से पूर्ण करेगा: सहकारी समितियों के लिए अधिकांश नए पंजीकरण कृषि क्षेत्र में नहीं हैं और अब आवास और श्रम जैसे क्षेत्रों में होरहे हैं।

 

 

पृथक मंत्रालय के साथ संबद्ध चिंताएं

  •         सत्ता का केंद्रीकरण: “सहकारिता” संविधान के अंतर्गत एक राज्य का विषय है एवं अनेक राज्यों का मानना ​​है कि एक पृथक मंत्रालय का गठन केंद्र के हाथों में शक्तियों को और केंद्रित करेगा।
  •         संघवाद के सिद्धांत से समझौता करता है: जैसा कि अनेक व्यक्तियों का मानना ​​​​था कि यह केंद्र सरकार द्वारा जमीनी संस्थानों पर, विशेषकर विपक्षी शासित राज्यों में नियंत्रण हासिल करने का एक और प्रयास है।

 

आगे की राह

  •         सहकारिताओं के लिए व्यापारिक सुगमता सुनिश्चित करें: सहकारिता मंत्रालय को पंजीकरण से लेकर समापन तक सहकारी समितियों के लिए व्यवसाय करना शुभम बनाना चाहिए।
  •         राज्यों के साथ सहयोग: आधुनिक बाजार अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के साथ संगत कानून सुनिश्चित करने और जमीन पर विभिन्न उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए।
  •         एकीकृत विनियमन: सभी सहकारी समितियों के लिए एकल विनियामक प्रदान करके।
  •         महिलाओं के नेतृत्व वाली सहकारी समितियों को सुविधा प्रदान करके: समाज के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना। वर्तमान में वे देश में 8 लाख सहकारी समितियों में से 3% से भी कम  का गठन करती हैं।
    Ministry of Cooperation (Hindi)_40.1

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