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प्रवासी श्रमिक संकट: सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देश, मुद्दे और प्रस्तावित समाधान

 

प्रासंगिकता

  • जीएस1: भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएं, भारत की विविधता।
  • जीएस 2: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप और उनके डिजाइन तथा कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

 

प्रसंग

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवासी श्रमिक वाद में अपना निर्णय सुनाते हुए कुछ दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं।

 

दिशा निर्देश 

  •         सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों से कहा है कि वे अपनी प्रवासी नीतियां बनाएं और प्रवासियों को खाद्यान्न उपलब्धता की गारंटी दें।
  •         न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि अपने घरों को लौट रहे प्रवासियों को सूखा राशन उपलब्ध कराया जाए।
  •         इसने कहा कि पहचान प्रमाणपत्र प्रवासी श्रमिकों की सहायता में बाधा नहीं बनना चाहिए ।
  •         इसने राज्यों से प्रवासी श्रमिकों के परिवहन की व्यवस्था करने को कहा।

 

एक प्रवासी कौन है?

  •         इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) के अनुसार, एक प्रवासी वह व्यक्ति है जो अपने स्वाभाविक निवास स्थान से दूर एक अंतरराष्ट्रीय सीमा या राज्य के भीतर घूम रहा है या चला गया है।
  •         वे कुल कार्यबल के 20% का गठन करते हैं और राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 10% योगदान करते हैं।

 

प्रवासी श्रमिक संकट: सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देश, मुद्दे और प्रस्तावित समाधान_30.1

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यह संकट अलग क्यों है?

  •         लॉकडाउन प्रेरित प्रवासी संकट प्रतिलोमित प्रवास का एक मुद्दा है – लोग शहरी क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों में, अपने घरों को वापस जा रहे हैं।

 

 

प्रतिलोमित प्रवास के मुद्दे

 

  •         ग्रामीण क्षेत्र इतने व्यापक कार्यबल को नियोजित नहीं कर सकते, इस प्रकार प्रच्छन्न बेरोजगारी की ओर अग्रसर हो सकते हैं
  •         उद्योगों को श्रम की कमी का सामना करना पड़ा है और वे प्रतिलोमित प्रवास के प्रत्यावर्तन की व्यग्रता सेप्रतीक्षा कर रहे हैं।
  •         श्रमिकों के भारी प्रवाह ने आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता पर दबाव डाला है ।

 

 

प्रवासी श्रमिक मुद्दे

  • आर्थिक मुद्दा

o   शहरी क्षेत्रों में सीमित अवसर, मुद्रास्फीति और उच्च जीवन स्तर के कारण प्रवासी श्रमिक शहरी क्षेत्रों में अभाव में रहते हैं।

  •         सामाजिक मुद्दा

o    ‘विदेशी’ भूमि से व्यक्तियों का अंतर्वाह प्रवासी श्रमिकों से स्थानीय लोगों के मध्य संघर्ष को प्रेरित करता है। इस कारण से प्रवासियों को शहरी क्षेत्रों में सामाजिक अलगाव का सामना करना पड़ता है।

  •        राजनीतिक मुद्दा

o   प्रवासी श्रमिक हमेशा बेहतर अवसरों की तलाश में भटकते रहते हैं। रोजगार की इस प्रकृति के कारण, वे शायद ही कभी मतदान कर पाते हैं। राजनीतिक नेताओं ने भी उनके न्यायसंगत कल्याण का उत्तरदायित्व लेना आवश्यक नहीं समझा।

 

एक राष्ट्र एक राशन कार्ड

 

सरकारी कदम

  •         अंतर्राज्यीय प्रवासी कामगार अधिनियम, 1979 का उद्देश्य प्रवासी श्रमिकों के शोषण को रोकना है।
  •         नीति आयोग ने हाल ही में प्रवासी श्रमिकों के लिए नीति पर एक प्रारूप दस्तावेज तैयार किया है।
  •         रोजगार पर नए सिरे से ध्यान देने के लिए दो नई कैबिनेट समितियों का गठन किया गया है। एक है कैबिनेट कमेटी ऑन इन्वेस्टमेंट एंड ग्रोथ और दूसरी कैबिनेट कमेटी ऑन एम्प्लॉयमेंट एंड स्किल डेवलपमेंट है।

 

 

आवश्यक समाधान

  •         विकास प्रक्रिया में असाम्यता और विषमताओं को कम करने के लिए सुधारात्मक उपाय किए जाने की आवश्यकता है।
  •         प्रवासी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना।
  •       एक सार्वभौमिक पंजीकरण निर्मित करना और स्मार्ट सामाजिक सुरक्षा कार्ड जारी करना, जैसा कि असंगठित क्षेत्र में उद्यम के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीईयूएस) द्वारा अनुशंसित है।
  •         4 नवीन श्रम संहिताओं में प्रवासी श्रमिकों के लिए विशेष खंड शामिल होनी चाहिए
  •         आवश्यकता है रोजगार गारंटी योजना की ग्रामीण क्षेत्रों के मनरेगा के समान शहरी क्षेत्रों के लिए।
  •         ग्रामीण क्षेत्रों के मनरेगा के समान शहरी क्षेत्रों के लिए रोजगार गारंटी योजना की आवश्यकता है।
  •         हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्रों को विकसित करने की आवश्यकता है ताकि प्रवास के प्रेरक कारकों को कम किया जा सके।

 

आगे की राह

 

हमें प्रवासी  श्रमिकों पर एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने के लिए एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता है, जो  श्रमिकों की सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं को समग्र रूप से संबोधित करे। यह एसडीजी 8 प्राप्त करने की दिशा में एक कदम होगा।

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