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श्रम संहिता: मजदूरी संहिता, 2019

  • श्रम संविधान की समवर्ती सूची के अंतर्गत समाविष्ट है।अतः, संसद एवं राज्य विधानमंडल दोनों ही श्रम के विनियमन से संबंधित विधान निर्मित कर सकते हैं।
  • केंद्र सरकार ने कहा है कि 100 से अधिक राज्य एवं 40 केंद्रीय विधान श्रम के विभिन्न पहलुओं जैसे कि औद्योगिक विवादों का समाधान,  कार्य दशाएँ, सामाजिक सुरक्षा एवं मजदूरी को विनियमित करते हैं ।
  • श्री रवींद्र वर्मा की अध्यक्षता वाले द्वितीय राष्ट्रीय श्रम आयोग, 2002 ने केंद्रीय श्रम कानूनों को व्यापक समूहों में समेकित करने की संस्तुति की, जैसे कि
    • औद्योगिक संबंध,
    • मजदूरी,
    • सामाजिक सुरक्षा,
    • सुरक्षा, एवं
    • कल्याण तथा कार्य दशाएँ

अनुपालन को सुगम बनाने  एवं श्रम विधानों में एकरूपता सुनिश्चित करने हेतु।

  • 2019 में, श्रम एवं नियोजन मंत्रालय ने 29 केंद्रीय विधानों को समेकित करने के लिए श्रम संहिता पर चार विधेयकप्रस्तुत किए थे।
  • ये संहिताएं विनियमित करती हैं:
    • मजदूरी
    • औद्योगिक संबंध
    • सामाजिक सुरक्षा
    • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशाएँ
  • इस लेख में, हम अपनी चर्चा को पारिश्रमिक (मजदूरी) संहिता तक ही सीमित रखेंगे।अन्य संहिताओं पर अलग-अलग लेखों में चर्चा की जाएगी।

 

मजदूरी संहिता, 2019

 

  • यह उन सभी नियोजन (रोजगार) क्षेत्रों में मजदूरी और बोनस भुगतान को विनियमित करने का प्रयास करता है जहां कोई उद्योग, व्यापार, व्यवसाय अथवा निर्माण कार्य संपादित किया जाता है।
  • संहिता निम्नलिखित चार विधानों को प्रतिस्थापित करती है:
    • मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936
    • न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948
    • अधिलाभ (बोनस) भुगतान अधिनियम, 1965, एवं
    • समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976
  • आच्छादन: संहिता सभी कर्मचारियों पर लागू होगी। केंद्र सरकार रेलवे, खदानों और तेल क्षेत्रों जैसे नियोजन के लिए वेतन संबंधी निर्णय लेगी। अन्य सभी नियोजनों के लिए राज्य सरकारें निर्णय लेंगी।
  • मजदूरी में वेतन, भत्ता, या मौद्रिक शब्दों में व्यक्त कोई अन्य घटक सम्मिलित है। इसमें कर्मचारियों को देय बोनस अथवा कोई यात्रा भत्ता शामिल नहीं है।
  • न्यूनतम मजदूरी: संहिता के अनुसार, केंद्र सरकार श्रमिकों के जीवन निर्वाह स्तर को ध्यान में रखते हुए एक  न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करेगी। इसके  अतिरिक्त, यह विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग न्यूनतम मजदूरी निर्धारित कर सकती है।
  • न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण: संहिता नियोक्ताओं को न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी का भुगतान करने से प्रतिबंधित करती है। न्यूनतम मजदूरी केंद्र अथवा राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित की जाएगी।
  • समयोपरि (ओवरटाइम): केंद्र अथवा राज्य सरकार उन घंटों की संख्या का निर्धारण कर सकती है जो एक सामान्य कार्य दिवस बनाते हैं। ओवरटाइम पारिश्रमिक, मजदूरी की सामान्य दर से कम से कम दोगुना होना चाहिए।
  • कटौतियां: संहिता के अंतर्गत, किसी कर्मचारी के वेतन में कुछ निश्चित आधारों पर कटौती की जा सकती है। यद्यपि, ये कटौतियां कर्मचारी के कुल वेतन के 50% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • बोनस का निर्धारण: सभी कर्मचारी जिनका वेतन केंद्र या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित एक विशिष्ट मासिक राशि से अधिक नहीं है, वे वार्षिक बोनस के हकदार होंगे। न्यूनतम बोनस होगा: उसके वेतन का 33%, या 100 रुपये, जो भी अधिक हो। एक कर्मचारी अपने वार्षिक वेतन का अधिकतम 20% बोनस प्राप्त कर सकता है।
  • लिंग विभेद: संहिता समान कार्य अथवा समान प्रकृति के कार्य हेतु वेतन और कर्मचारियों के चयन से संबंधित मामलों में लैंगिक विभेद को प्रतिबंधित करती है।
  • सलाहकार बोर्ड: केंद्र और राज्य सरकारें सलाहकार बोर्ड का गठन करेंगी। केंद्रीय सलाहकार बोर्ड में निम्न शामिल होंगे:
    • नियोक्ता,
    • कर्मचारी (नियोक्ताओं के समान संख्या में),
    • स्वतंत्र व्यक्ति, एवं
    • राज्य सरकारों के पांच प्रतिनिधि।
  • राज्य सलाहकार बोर्ड में नियोक्ता, कर्मचारी और स्वतंत्र व्यक्ति शामिल होंगे।
    • इसके अतिरिक्त, केंद्र और राज्य दोनों बोर्डों के कुल सदस्यों में से एक तिहाई महिलाएं होंगी।
  • अपराध: दंड अपराध की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग होते हैं, जिसमें अधिकतम दंड तीन माह के कारावास   के साथ एक लाख रुपये तक का अर्थ-दंड (जुर्माना) शामिल है।

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