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श्रम संहिता: औद्योगिक संबंध संहिता, 2020

विगत लेख में, हमने श्रम संहिता: मजदूरी संहिता, 2019 पर चर्चा की। इस लेख में, हम औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की विशेषताओं पर चर्चा करेंगे। शेष संहिताओं पर आगे के लेखों में चर्चा की जाएगी।  यह संहिता तीन श्रम विधानों को समाहित  एवं प्रतिस्थापित करती है:

  • औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947;
  • ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926; एवं
  • औद्योगिक नियोजन(स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946।

 

स्थायी आदेश

  • स्थायी आदेशों की अनुप्रयोज्यता: संहिता में प्रावधान है कि 300 या अधिक श्रमिकों वाले सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों को सूचीबद्ध विषयों पर स्थायी आदेश तैयार करने होंगे।
  • सरकार की पूर्व अनुमति: संहिता के अंतर्गत,  न्यूनतम 300 श्रमिकों वाले एक प्रतिष्ठान को बंद करने, कार्य-बंदी अथवा छंटनी से पूर्व सरकार की पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता होती है।
    • कार्य-बंदी एक नियोक्ता की प्रतिकूल व्यावसायिक परिस्थितियों के समक्ष किसी कर्मचारी को नियोजित करने की अक्षमता को संदर्भित करता है।
    • छंटनी का तात्पर्य अनुशासनात्मक कार्रवाई के अतिरिक्त किसी अन्य कारण से किसी कर्मचारी की सेवा की समाप्ति से है।
    • केंद्र सरकार का सीमा में संशोधन करने का अधिकार: संहिता सरकार को प्रतिष्ठानों को बंद करने, कार्य-बंदी या छंटनी से पहले पूर्व अनुमति लेने हेतु सीमा बढ़ाने (किंतु कम करने का नहीं) का अधिकार दान करती है।

वार्ता संघ एवं परिषद

  • एकल वार्ता संघ: यदि एक प्रतिष्ठान में कार्य करने वाले श्रमिकों के एक से अधिक पंजीकृत मजदूर संघ (ट्रेड यूनियन) हैं, तो 51% से अधिक श्रमिकों वाले ट्रेड यूनियन को एकल (एकमात्र) वार्ता संघ के रूप में मान्यता प्रदान की जाएगी।
  • वार्ता परिषद: यदि कोई भी ट्रेड यूनियन एकमात्र वार्ता संघ के रूप में अर्हता नहीं रखता है, तो यूनियनों के प्रतिनिधियों से मिलकर एक वार्ता परिषद का गठन किया जाएगा, जिसमें न्यूनतम 20% कार्यकर्ता सदस्य हों।
  • एकल श्रमिक की बर्खास्तगी से संबंधित विवाद: 2020 का विधेयक किसी एकल श्रमिक सेवा से पदच्युति, बर्खास्तगी, छंटनी, या अन्यथा सेवा समाप्ति के संबंध में किसी भी विवाद को औद्योगिक विवाद के रूप में वर्गीकृत करता है।
    • श्रमिक विवाद के न्यायनिर्णयन के लिए औद्योगिक विवाद न्यायाधिकरण में आवेदन कर सकता है। श्रमिक विवाद के समझौते के लिए आवेदन करने के 45 दिन बाद न्यायाधिकरण में आवेदन कर सकता है।

हड़ताल और तालाबंदी

  • हड़ताल या तालाबंदी से 14 दिन पहले पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।
  • यह नोटिस अधिकतम 60 दिनों के लिए वैध है।
  • संहिता हड़ताल एवं तालाबंदी को भी प्रतिबंधित करती है:
    • समझौता प्रक्रिया के दौरान और सात दिनों तक,  तथा
    • अधिकरण के समक्ष कार्यवाही के दौरान और उसके बाद साठ दिनों तक

न्यायाधिकरण

  • संहिता औद्योगिक विवादों के निर्णयन के लिए औद्योगिक न्यायाधिकरण एवं एक राष्ट्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण के गठन का प्रावधान करती है।
    • अधिकरण द्वारा पारित अधिनिर्णय 30 दिनों की समाप्ति पर प्रवर्तन योग्य होंगे
    • यद्यपि, सरकार राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था अथवा सामाजिक न्याय को प्रभावित करने वाले सार्वजनिक आधारों पर कुछ परिस्थितियों में अधिनिर्णय के प्रवर्तन को स्थगित कर सकती है
    • उपयुक्त सरकार अधिनिर्णय को अस्वीकार या संशोधित करने का आदेश भी दे सकती है।

निश्चित अवधि नियोजन, स्थायी नियोजन एवं अनुबंध श्रमिक

  • संहिता निश्चित अवधि के नियोजन पर प्रावधान प्रस्तुत करती है। निश्चित अवधि के नियोजन से तात्पर्य कर्मचारी एवं नियोक्ता के मध्य हस्ताक्षरित अनुबंध के आधार पर एक निश्चित अवधि के लिए नियोजित श्रमिकों से है।

निश्चित अवधि के नियोजन, स्थायी नियोजन और अनुबंध श्रमिक के मध्य तुलना

लक्षण निश्चित अवधि के कर्मचारी स्थायी कर्मचारी अनुबंध श्रमिक
नियोजन का प्रकार
  • लिखित अनुबंध के अंतर्गत रोजगार। कोई ठेकेदार   अथवा एजेंसी  सम्मिलित नहीं होती है।
  • प्रतिष्ठान के भुगतान रजिस्टर (पे रोल) पर।
  • एक लिखित अनुबंध के अंतर्गत प्रत्यक्ष नियोजन।
  • प्रतिष्ठान के पे-रोल पर  ।
  • एक ठेकेदार या एजेंसी के माध्यम से एक प्रतिष्ठान में संलग्न।
  • प्रतिष्ठान के पे-रोल पर नहीं।
अवधि
  • निर्धारित निश्चित अवधि।
  • कार्यकाल पूर्ण होने पर नियोजन समाप्त हो जाता है, जब तक कि नवीनीकरण न किया जाए। छंटनी के लिए  इसी प्रकार का नोटिस देने की आवश्यकता नहीं है।
  • स्थायी आधार पर नियोजित
  • नियोजन की समाप्ति के लिए नोटिस देना होगा।
  • ठेकेदार के साथ  वार्ता की शर्तों के आधार पर।
कार्य की प्रकृति
  • निर्दिष्ट नहीं है।
  • नियमित कार्य  हेतु नियुक्त किया जाता है।
  • कुछ मामलों में  नियोजन निषिद्ध हो सकता है, उदाहरण के लिए, यदि समान कार्य नियमित कामगारों द्वारा संपादित किया जाता है।

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