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भारतीय रेलवे की कवच ​​प्रणाली

कवच ​​प्रणाली-यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: शासन, प्रशासन एवं चुनौतियां- विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां  एवं  अंतः क्षेप तथा उनकी अभिकल्पना एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

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चर्चा में कवच प्रणाली

  • हाल ही में केंद्रीय रेल मंत्री ने गुल्लागुड़ा-चिटगिड्डा रेलवे स्टेशनों के मध्य ‘कवच’ कार्य प्रणाली के परीक्षण का निरीक्षण किया।
    • उनकी उपस्थिति में ‘कवच’ प्रणाली का व्यापक परीक्षण किया गया।
  • परीक्षण के दौरान, दोनों इंजनों के एक दूसरे की ओर बढ़ने के कारण आमने-सामने की टक्कर की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
    • ‘कवच’ प्रणाली ने स्वचालित ब्रेकिंग सिस्टम को प्रारंभ किया एवं इंजनों को एक दूसरे से 380 मीटर की दूरी पर रोक दिया।भारतीय रेलवे की कवच ​​प्रणाली_50.1

कवच प्रणाली क्या है?

  • कवच प्रणाली के बारे में: भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन में सुरक्षा के कॉर्पोरेट उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए ‘कवच’ स्वदेशी रूप से विकसित एक एटीपी है।
    • कवच प्रणाली सुरक्षा समग्रता स्तर – 4 मानकों की एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है।
  • डिजाइन तथा विकास: कवच प्रणाली को भारतीय उद्योग जगत के सहयोग से अनुसंधान डिजाइन तथा मानक संगठन ( रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन/आरडीएसओ) द्वारा डिजाइन तथा विकसित किया गया है।
    • कवच प्रणाली के परीक्षणों को दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा सुगम बनाया गया था।
  • उद्देश्य: कवच ट्रेनों को खतरे (लाल) पर सिग्नल पास करने से रोकने तथा टक्कर से बचने के लिए सुरक्षा प्रदान करने हेतु  निर्देशित है।
    • यदि चालक गति सीमाओं के अनुसार ट्रेन को नियंत्रित करने में विफल रहता है, तो कवच ट्रेन ब्रेकिंग सिस्टम को स्वचालित रूप से सक्रिय कर देता है।
    • इसके अतिरिक्त, यह एक कार्यात्मक कवच प्रणाली से लैस दो लोकोमोटिव के मध्य टकराव को रोकता है।
  • संगुणन महत्व: ‘कवच’ सर्वाधिक सस्ती, सुरक्षा समग्रता स्तर 4 (एसआईएल -4) प्रमाणित तकनीकों में से एक है, जिसमें त्रुटि की संभावना 10,000 वर्षों में 1 है।
    • साथ ही, यह रेलवे के लिए इस स्वदेशी तकनीक के निर्यात के व्यापार मार्ग खोलता है।
  • लक्ष्य: आत्मनिर्भर भारत के एक हिस्से के रूप में, 2022-23 में सुरक्षा एवं क्षमता वृद्धि के लिए 2,000 किमी नेटवर्क को कवच के तहत लाया जाएगा।
    • कवच के तहत लगभग 34,000 किलोमीटर नेटवर्क को लाया जाएगा।

कवच प्रणाली की मुख्य विशेषताएं

  • खतरे पर सिग्नल पासिंग की रोकथाम (एसपीएडी)
  • ड्राइवर मशीन इंटरफेस (डीएमआई) / लोको पायलट ऑपरेशन सह इंडिकेशन पैनल (एलपीओसीआईपी) में सिग्नल पहलुओं के प्रदर्शन के साथ मूवमेंट अथॉरिटी का निरंतर अद्यतन
  • ओवर स्पीडिंग की रोकथाम के लिए स्वचालित ब्रेक लगाना
  • समपार फाटकों के पास पहुंचते समय स्वतंत्र रूप से सीटी बजना
  • कार्यात्मक कवच से लैस दो इंजनों के  मध्य टकराव की रोकथाम।
  • आपातकालीन स्थितियों के दौरान एसओएस संदेश
  • नेटवर्क मॉनिटर सिस्टम के माध्यम से ट्रेन की गतिविधियों की केंद्रीकृत लाइव निगरानी।

 

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