भारत-यूरोपीय संघ संबंध_00.1
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भारत-यूरोपीय संघ संबंध

प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध– द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह एवं भारत से संबद्ध और / या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।

 

प्रसंग

 

  • यूरोपीय संघ (ईयू) ने 1 जुलाई, 2021 से एक ग्रीन पास” (जिसे ईयू डिजिटल कोविड प्रमाणपत्र भी कहा जाता है) संस्थित करने की योजना बनाई है।
  • भारत ने यूरोपीय संघ को एक “पारस्परिक नीति” प्रस्तुतकरने हेतु आगाह किया है, जो केवल उन यूरोपीय देशों के लिए यात्रा सुगमता की अनुमति प्रदान करता है जो भारतीय टीकों कोविशील्ड एवं कोवैक्सिन को मान्यता देते हैं।

 

ग्रीन पास एवं संबंधित मुद्दे

 

  • ग्रीन पास: यह एक डिजिटल साक्ष्य है जो दर्शाता है कि किसी व्यक्ति को या तो कोविड -19 के प्रति टीका लगाया गया है, एक ऋणात्मक जांच परिणाम प्राप्त हुआ है अथवा कोविड -19 से स्वस्थ हो चुका है।
    • प्रमाणपत्र डिजिटल एवं पेपर दोनों प्रारूप में है, एक क्यूआर कोड के साथ आता है जो निःशुल्क है, राष्ट्रीय भाषा एवं अंग्रेजी में है, सभी यूरोपीय संघ के देशों में सुरक्षित एवं निरापद तथा मान्य है।
    • यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (ईएमए) द्वारा चार स्वीकृत टीके: फाइजर / बायोएनटेक का कॉमिरनेटी; मॉडर्ना; एस्ट्राजेंका का वैक्स्ज़र्वरिया; एवं जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा जानसेन।
  • संबद्ध चिंताएं:
    • भारतीय टीकों को छूट: कोविशील्ड (एसआईआई द्वारा भारत में निर्मित एस्ट्राजेंका वैक्सीन का संस्करण) एवं कोवैक्सिन (भारत बायोटेक द्वारा निर्मित) सदृश, यूरोपीय संघ के डिजिटल कोविड प्रमाणपत्र या “ग्रीन पास” के लिए पात्र नहीं हैं।
    • अफ्रीकी संघ द्वारा विरोध:भारत एवं “निम्न-आय वाले” देशों के लोगों के लिए “असमानता” को बढ़ावा देने के आधार पर जिनके लिए कोविशील्ड वैक्सीन अंतर्राष्ट्रीय कोवैक्स मैत्री कार्यक्रम की “रीढ़” थी।

भारत-यूरोपीय संघ संबंध_50.1

 

भारत-यूरोपीय संघ संबंध: सहयोग के क्षेत्र

 

  • अनुयोजकता साझेदारी: मई, 2021 में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ के आभासी शिखर सम्मेलन के दौरान विमोचन किया गया।
  • उद्देश्य: डिजिटल, ऊर्जा, परिवहन एवं व्यक्ति से व्यक्ति के मध्य संपर्क सुनिश्चित करना एवं दोनों देशों को अफ्रीका, मध्य एशिया से लेकर व्यापक हिंद – प्रशांत तक विस्तृत क्षेत्रों में स्थायी संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाना।
  • आर्थिक महत्व:
    • यूरोपीय संघ, चीन (12%) एवं अमेरिका (11.7%) के बाद भारत का तीसरा सर्वाधिक बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जो 2020 में € 62.8 बिलियन की वस्तुओं के व्यापार या कुल भारतीय व्यापार का 11.1% के लिये उत्तरदायी है।
    • यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारतीय निर्यात (कुल का 14%) के लिए दूसरा सर्वाधिक बड़ा गंतव्य है।
  • रणनीतिक साझेदारी: भारत चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए यूरोपीय संघ के लिए एक उपयुक्त भागीदार है, जबकि यूरोपीय संघहिंद-प्रशांत थिएटर में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भारत का एक विश्वसनीय भागीदार हो सकता है।
  • जलवायु परिवर्तन: भारत 2050 तक अपने कार्बन-उत्सर्जन को निष्प्रभावी करने के लिए यूरोपीय संघ की ‘ग्रीन डील’ नामक एक नई औद्योगिक रणनीति से ज्ञान प्राप्त कर सकता है।
    • सहयोग: पेरिस समझौते एवं अन्य सतत विकास लक्ष्यों के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत एवं यूरोपीय संघ के मध्य।
  • वैश्विक स्वास्थ्य पर सहयोग: विगत वर्ष में भारत ने दूसरों की सहायता करने में जो भूमिका निभाई है, उसे मान्यता प्रदान करने के लिए यूरोपीय संघ के सदस्य-राज्यों ने विगत कुछ सप्ताह में महत्वपूर्ण चिकित्सा आपूर्ति भेजकर भारत का समर्थन करने के लिए लामबंदी की है।

 

आगे की चुनौतियाँ

 

  • आर्थिक मुद्दे:
    • अतृप्त क्षमता: भारत चीन (16.1%), यूएसए (15.2%), एवं यूके (12.2%) से काफी पीछे यूरोपीय संघ का 10वां सर्वाधिक बड़ा व्यापारिक भागीदार (2020 में यूरोपीय संघ के कुल व्यापार का 1.8%) है।
    • द्विपक्षीय विस्तृत आधार व्यापार एवं निवेश समझौता (बीटीआईए): 2007 में प्रारंभ, अभी तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। हाल ही में भारत एवं यूरोपीय संघ दोनों इस प्रक्रिया में गति लाने पर सहमति व्यक्त की।
  • प्रतिबंधात्मक नियामक वातावरण: व्यापार के लिए तकनीकी बाधाएं (टीबीटी), स्वच्छता एवं फाइटो-सैनिटरी (एसपीएस) उपाय, एवं भारत द्वारा विधायी या प्रशासनिक उपायों के आधार पर विभेद, वस्तुओं, सेवाओं, निवेश एवं सार्वजनिक क्रय सहित क्षेत्रकों की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रभावित करता है।
  • रणनीतिक मुद्दे: यूरोपीय संघ में आर्थिक एवं अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में चीन का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए चिंता का विषय है।
    • यूरोपीय संघ ने हाल ही में चीन के साथ निवेश पर एक व्यापक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसकी अत्यधिक आलोचना हुई है एवं राजनयिक तनावों के कारण अब इसके अनुसमर्थन को निलंबित कर दिया गया है।

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आगे की राह

 

  • भू-आर्थिक सहयोग: भारत सुरक्षा वर्णक्रम से नहीं तो भू-आर्थिक रूप से, हिंद-प्रशांत वृत्तांत में संलग्न होने के लिए यूरोपीय संघ के देशों का अनुगमन कर सकता है।
  • आर्थिक विकास की संभावना: भारत अपने निर्यात बाजार का विस्तार करने के लिए यूरोपीय संघ के बाजार का लाभ उठा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय आय एवं औद्योगिक क्षेत्र में अधिक अनवरत वृद्धि हो सकती है जैसा कि आर्थिक सर्वेक्षण, 2020-21 द्वारा सुझाया गया है।
    • भारत-यूरोपीय संघ बीआईटी संधि को समाप्त करें: दोनों देशों की पूर्ण व्यापार क्षमता प्राप्त करने के लिए।
  • स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में निवेश: यूरोपीय संघ स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में निवेश करके 2050 तक भारत को कार्बन-निष्प्रभावी दर्जा प्राप्त करने में सहायता कर सकता है।
    • वे अन्य संसाधन विहीन देशों में स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को कार्यान्वित करने के लिए भी सहयोग कर सकते हैं।
  • कोविड-19 महामारी के प्रभावों का प्रतिरोध करना: यूरोपीय संघ अपने ग्रीन पास प्रणाली के अंतर्गत भारतीय टीकों को सम्मिलित करना चाहिए ताकि टीका लगाए गए भारतीय व्यक्तियोंका निर्बाधआवागमन सुनिश्चित हो सके, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के मध्य वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार में तीव्र गति से सुधार होगा।
    • प्रतिस्कंदी चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना: वर्तमानकोविड-19 महामारी एवं भविष्य की अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों से लड़ने के लिए भारत एवं यूरोपीय संघ दोनों के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।

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